बारिश थमने के साथ ओडिशा में हालात सुधरे, प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी

43 ओड्राफ और एनडीआरएफ टीमें तैनात, 13,221 लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए; 49 राहत शिविर सक्रिय

भुवनेश्वर, 29 सितंबर (हि.स.)। ओडिशा में बारिश की तीव्रता कम होने के साथ ही अधिकांश प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति में सुधार हो रहा है। राज्य सरकार का स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर सभी जिला इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर के साथ समन्वय कर स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। स्थानीय बाढ़, निचले इलाकों में जलभराव तथा मौसम संबंधी अन्य परिस्थितियों से निपटने के लिए जिला प्रशासन को सतर्क रखा गया है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य के सभी जिलों में एक या दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश अथवा गरज के साथ बारिश होने की संभावना है। एहतियाती कदम के तौर पर बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रापड़ा, जगतसिंहपुर, कटक, क्योंझर और मयूरभंज जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

29 सितंबर सुबह 8.30 बजे तक पिछले 24 घंटों में राज्य में औसतन 1.1 मिमी बारिश दर्ज की गई। कटक जिले के बांकी-डमपड़ा ब्लॉक में सर्वाधिक 45.0 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि 12 ब्लॉकों में 10 मिमी से अधिक बारिश हुई। जिला औसत के अनुसार, कटक में 9.5 मिमी, पुरी में 6.3 मिमी, गजपति में 4.9 मिमी, खुर्दा में 2.9 मिमी, ढेंकानाल में 2.5 मिमी, कोरापुट में 2.4 मिमी और मलकानगिरी में 1.9 मिमी बारिश दर्ज की गई।

1 से 29 सितंबर के बीच राज्य में कुल 316.2 मिमी बारिश हुई है, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 233.4 मिमी है। इस तरह राज्य में सामान्य से 35.5 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।

राज्य की आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था के तहत वर्तमान में 36 ओड्राफ और 7 एनडीआरएफ समेत कुल 43 टीमें विभिन्न क्षेत्रों में तैनात हैं। इनमें बालेश्वर में 14, भद्रक में 9, कोरापुट में 4, जाजपुर में 4, जगतसिंहपुर में 3 और नबरंगपुर में 2 टीमें शामिल हैं। इसके अलावा ओएसएपी की छठी बटालियन, कटक तथा एनडीआरएफ की तीसरी बटालियन, मुंडली में रिजर्व टीमें तैयार रखी गई हैं।

प्रशिक्षित टीमें आवश्यकता के अनुसार राहत, बचाव, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और अन्य आपातकालीन कार्यों के लिए तैयार हैं।

प्रभावित क्षेत्रों में जिला प्रशासन द्वारा एहतियाती तौर पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तथा राहत कार्य जारी रखा गया है। अब तक 13,221 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है और 49 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां विस्थापित लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

बालेश्वर, नबरंगपुर, जाजपुर, भद्रक, संबलपुर, बरगढ़, कंधमाल और जगतसिंहपुर के कुछ इलाके प्रभावित हुए हैं। संबंधित जिला प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रखते हुए प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहा है।

बालेश्वर के छह ब्लॉक, 72 ग्राम पंचायत और 479 गांव प्रभावित हुए हैं। यहां 48,560 लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि 7,452 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जिले में 15 राहत शिविर संचालित हैं।

नबरंगपुर के एक ब्लॉक, दो ग्राम पंचायत और दो गांव प्रभावित हुए हैं। कुल 85 लोग प्रभावित हुए हैं और दो राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं।

जाजपुर में दो ब्लॉक, 12 ग्राम पंचायत और 36 गांव प्रभावित हुए हैं। कुल 5,059 लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 3,876 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जिले में 19 राहत शिविर सक्रिय हैं।

भद्रक के पांच ब्लॉक, 57 ग्राम पंचायत और 172 गांव प्रभावित हुए हैं। कुल 18,691 लोग प्रभावित हुए हैं। प्रभावित परिवारों को भोजन और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

संबलपुर में एक शहरी स्थानीय निकाय और दो वार्ड प्रभावित हुए हैं। कुल 215 लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 93 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। यहां तीन राहत शिविर संचालित हैं।

बरगढ़ के एक ब्लॉक, दो ग्राम पंचायत और चार गांव प्रभावित हुए हैं। कुल 978 लोग प्रभावित हुए हैं और सभी 978 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जिले में चार राहत शिविर सक्रिय हैं।

कंधमाल में एक ब्लॉक, दो ग्राम पंचायत और दो गांव प्रभावित हुए हैं। यहां आठ लोगों के प्रभावित होने की सूचना है।

जगतसिंहपुर के दो ब्लॉक, छह ग्राम पंचायत और आठ गांव प्रभावित हुए हैं। कुल 1,188 लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 822 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जिले में छह राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं।

प्रभावित जिलों में पशुओं के लिए चारे की आवश्यकता को देखते हुए सरकार ने भी आवश्यक व्यवस्था की है। अब तक कुल 907.04 मीट्रिक टन पशु चारा उपलब्ध कराया गया है। इसमें बालेश्वर को 400 मीट्रिक टन, भद्रक को 380.5 मीट्रिक टन, जाजपुर को 67.74 मीट्रिक टन, मयूरभंज को 40 मीट्रिक टन और कोरापुट को 18.80 मीट्रिक टन पशु चारा उपलब्ध कराया गया है।

वर्तमान में मछुआरों के लिए कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है।

स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर द्वारा सभी जिला इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर के साथ समन्वय करते हुए 24 घंटे स्थिति की निगरानी की जा रही है। स्थानीय स्तर पर सड़कों पर पानी का बहाव, निचले इलाकों में जलभराव तथा शहरी क्षेत्रों में अंडरपास बंद होने जैसी संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए जिला प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

बारिश की तीव्रता कम होने के साथ राज्य में स्थिति में सुधार हो रहा है। हालांकि, सरकार और जिला प्रशासन स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होने वाली किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निगरानी, आवश्यकता के अनुसार सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरण और राहत-बचाव कार्य लगातार जारी है।

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