- रक्षा मंत्री देश के समुद्री नजरिए और नौसेना से अपना विजन और गाइडेंस साझा करेंगे
नई दिल्ली, 28 सितंबर (हि.स.)। साल में दो बार होने वाली नौसेना कमांडरों की कॉन्फ्रेंस तीन दिनों के लिए एक अक्टूबर से नई दिल्ली के नौसेना भवन में होगी। नौसेना के शीर्ष नेतृत्व स्तर पर होने वाली इस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ अधिकारी सैन्य रणनीतिक स्तर पर ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा करेंगे। इस कॉन्फ्रेंस में संस्थागत प्रणाली के जरिए वरिष्ठ नौसेना नेतृत्व जुड़ेंगे, जिसमें आउटस्टेशन ऑपरेशनल और एरिया कमांडर शामिल हैं।
नौसेना के कैप्टन विवेक मधवाल ने बताया कि यह कॉन्फ्रेंस पश्चिम एशिया में चल रहे झगड़ों के बीच भारत के समुद्री हितों की सुरक्षा में नौसेना के योगदान को दिखाने में अहम होगी, जिसमें ‘एनर्जी की सुरक्षा’ भी शामिल है। इस सम्मेलन के जरिए नौसेना के चल रहे ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती से चलाने और भरोसेमंद समुद्री ताकत के तौर पर उभरने, हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे ‘पसंदीदा सुरक्षा पार्टनर’ के तौर पर नौसेना की हैसियत को और मजबूत होगी।
कॉन्फ्रेंस के पहले दिन रक्षा मंत्री देश के समुद्री नजरिए और नौसेना से उम्मीदों पर अपना विजन और मार्गदर्शन साझा करेंगे। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ भी तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और इंटीग्रेशन को बढ़ावा देने के लिए नेवल कमांडरों के साथ बातचीत करेंगे। आगे के दिनों में नौसेना प्रमुख कमांडरों के साथ ऑपरेशन्स, मटेरियल, लॉजिस्टिक्स, राहत एवं बचाव, ट्रेनिंग, एआई, बिग डेटा एनालिसिस, ऑटोनॉमस/अनक्रूड सिस्टम और साइबर ऑप्स जैसी खास टेक्नोलॉजी को शामिल करने जैसे खास फोकस एरिया का रिव्यू करेंगे, जिससे कटिंग-एज वॉर फाइटिंग कॉन्सेप्ट को अपनाने और टेक्नोलॉजी को तेजी से अपनाने की जरूरत पर जोर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि बड़े स्तर पर नौसेना नेतृत्व भारत सरकार के आत्मनिर्भरता और विकसित भारत-2047 के विजन को पूरा करने के लिए जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता, इनोवेशन के तीन बुनियादी पिलर के हिसाब से फोर्स लेवल को अनुकूलन करने और लड़ाई की तैयारी बढ़ाने के लिए पूरी तैयारी का आकलन करेगा। भारतीय नौसेना देश की सेवा में लड़ाई के लिए तैयार, भरोसेमंद, एकजुट और भविष्य के लिए तैयार फोर्स के तौर पर अपने रास्ते पर मजबूती से काम करते हुए ऑपरेशन की तेज रफ़्तार बनाए हुए है।
