नई दिल्ली, 25 सितंबर (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को सुभाषितम् में सफलता, नवाचार के लिए निरंतर प्रयास, दृढ़ता और समर्पित कार्रवाई के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृत के एक श्लोक को एक्स पर साझा करते हुए लिखा, “‘यथा यथा प्रयत्नः स्याद्भवेदशु फलं तथा। इति पौरुषमेवस्ति दैवमस्तु तदेव च॥’ जिसका भावार्थ है कि किसी व्यक्ति का प्रयास और लगन जितनी अधिक होती है, सफलता उतनी ही जल्दी प्राप्त होती है। नवाचार भी निरंतर प्रयास पर आधारित होता है। इसलिए, यह भाग्य नहीं बल्कि समर्पित कार्य, साहस और नए विचारों को वास्तविकता में बदलने का दृढ़ संकल्प ही सफलता और नवाचार का मार्ग प्रशस्त करता है।”
उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा के साझेदार पंडित उपाध्याय को उनकी जयंती पर सादर नमन किया गया। उन्होंने समाज के अंतिम पंक्ति में शामिल व्यक्ति के संकल्प को राष्ट्र निर्माण का आधार माना और अंत्योदय का एक ऐसा सिद्धांत दिया, जो आज भी जन कल्याण की अद्भुत प्रेरणा देता है। आइए, इस विशेष अवसर पर उनके विचारों एवं आदर्शों को स्थापित कर सामाजिक और राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं को समर्पित करने का संकल्प लिया जाए। उल्लेखनीय है कि उनकी जयंती (25 सितंबर) को देश भर में ‘अंत्योदय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
