कोलकाता, 19 सितंबर (हि.स.)। पूर्व रेलवे ने कबाड़ निपटान के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए देश के शीर्ष तीन जोनल रेलवे में अपना स्थान बनाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों में कबाड़ की बिक्री के माध्यम से पूर्व रेलवे ने 251.92 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। अधिकारियों के अनुसार, यह सफलता अनुपयोगी और पुराने सामानों की नियमित पहचान, निरंतर निगरानी और पारदर्शी निपटान प्रक्रिया के कारण संभव हो सकी है।
शनिवार को जारी बयान में रेलवे ने बताया है कि यह उपलब्धि पूर्व रेलवे के ‘मिशन शून्य कबाड़ संतुलन’ अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कार्यशालाओं, डिपो, शेड, यार्ड और अन्य रेलवे परिसरों में पड़े अप्रचलित और अनुपयोगी सामानों का व्यवस्थित ढंग से निस्तारण करना है। 31 अगस्त 2026 तक निर्धारित 207.17 करोड़ रुपये के आनुपातिक लक्ष्य के मुकाबले पूर्व रेलवे ने 251.92 करोड़ रुपये जुटाए, जो लक्ष्य से 21 प्रतिशत से अधिक है। इसके साथ ही, यह चालू वित्त वर्ष के 565 करोड़ रुपये के कुल वार्षिक लक्ष्य का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा पहले पांच महीनों में ही हासिल कर चुका है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 193 करोड़ रुपये था, जिसकी तुलना में इस वर्ष 30.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
इस राजस्व संग्रह में सबसे बड़ा योगदान अप्रचलित इंजीनियरिंग और ट्रैक सामग्री की बिक्री से मिला। पूर्व रेलवे ने लगभग 11,500 मीट्रिक टन पुरानी पटरियों का निपटान कर 28.56 करोड़ रुपये प्राप्त किए। इसके अलावा, लगभग 29,055 मीट्रिक टन विविध लौह कबाड़ से 100.63 करोड़ रुपये और गैर-लौह कबाड़ से 53.65 करोड़ रुपये का राजस्व मिला।
इसके साथ ही, अनुपयोगी घोषित किए गए रोलिंग स्टॉक की नीलामी से भी काफी आय हुई। पहले पांच महीनों के दौरान 175 अनुपयोगी यात्री डिब्बों के निस्तारण से 31.87 करोड़ रुपये और 310 मालगाड़ी वैगनों की नीलामी से 11.82 करोड़ रुपये जुटाए गए।
पूर्व रेलवे के प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक संदीप शुक्ला ने बताया कि यह उपलब्धि समन्वित प्रयासों, कबाड़ की समय पर पहचान और इलेक्ट्रॉनिक नीलामी प्रणाली के माध्यम से पारदर्शी निपटान के कारण संभव हुई है। यह अभियान पूर्व रेलवे के चारों मंडलों हावड़ा, सियालदह, आसनसोल और मालदा के साथ-साथ जमालपुर, लिलुआ, हालिशहर और कांचरापाड़ा स्थित प्रमुख कार्यशालाओं और स्टोर डीपो में व्यापक स्तर पर चलाया गया।
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम मांझी ने कहा कि कबाड़ निपटान अभियान से न केवल रेलवे को गैर-किराया राजस्व प्राप्त हो रहा है, बल्कि इससे बहुमूल्य रेलवे भूमि और भंडारण स्थल भी खाली हो रहे हैं। इससे कार्यस्थल की सुरक्षा और स्वच्छता में सुधार के साथ-साथ धातुओं के पुनर्चक्रण को भी बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व रेलवे ‘मिशन शून्य कबाड़ संतुलन’ के लक्ष्य को पूरी तरह प्राप्त करने के लिए इस अभियान को आगे भी इसी गति से जारी रखेगा।
