नई दिल्ली, 17 सितंबर: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत उचित मूल्य की दुकानों (FPS) के डीलरों के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी धनराशि के उपयोग में त्रिपुरा पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे आगे रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्र से स्वीकृत राशि के मुकाबले त्रिपुरा ने सबसे अधिक खर्च दर्ज किया है।
फूड सेक्रेटरीज कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में त्रिपुरा के लिए ₹39.82 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी। इसमें से ₹17.10 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। इस तरह राज्य ने स्वीकृत राशि का 42.9 प्रतिशत उपयोग किया है।
पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में मेघालय को ₹32.83 करोड़ स्वीकृत किए गए थे, जिसके मुकाबले ₹3.29 करोड़ खर्च हुए हैं। यह कुल स्वीकृत राशि का 10 प्रतिशत है। मणिपुर में ₹32.77 करोड़ की स्वीकृत राशि के मुकाबले ₹2.73 करोड़ खर्च हुए, जो 8.3 प्रतिशत है।
सिक्किम में ₹6.15 करोड़ की स्वीकृत राशि में से ₹0.41 करोड़ खर्च हुए हैं, जबकि मिजोरम में ₹11.50 करोड़ की स्वीकृत राशि के मुकाबले ₹0.75 करोड़ खर्च किए गए हैं। दोनों राज्यों में राशि के उपयोग की दर क्रमशः 6.7 प्रतिशत और 6.5 प्रतिशत रही।
वहीं, नागालैंड को ₹21.36 करोड़ की राशि स्वीकृत होने के बावजूद अब तक कोई वास्तविक खर्च दर्ज नहीं किया गया है। राज्य में स्वीकृत राशि के उपयोग की दर शून्य प्रतिशत रही।
रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वोत्तर के छह राज्यों को मिलाकर कुल ₹144.43 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। इनमें त्रिपुरा ने स्वीकृत राशि के उपयोग के मामले में सबसे अधिक 42.9 प्रतिशत दर्ज किया है, जबकि नागालैंड में अभी तक कोई खर्च दर्ज नहीं हुआ है।
