अगरतला, 5 सितंबर: विलेज काउंसिल चुनाव में विपक्षी उम्मीदवारों, विशेष रूप से वामपंथी उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से रोकने के लिए बाधाएं पैदा की जा रही हैं। त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व पोलित ब्यूरो सदस्य माणिक सरकार ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह आरोप लगाया। उनका दावा है कि कुछ उपमंडलों में इस तरह की घटनाएं विशेष रूप से सामने आ रही हैं।
पत्रकारों से बातचीत में माणिक सरकार ने कहा कि आगामी 8 सितंबर तक नामांकन पत्र दाखिल करने का अवसर है। इस दौरान धमकी और दबाव के बावजूद विपक्षी दल चुनावी मैदान में उतरने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चुनावों की तुलना में इस बार सीधे तौर पर वाम मोर्चा और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से रोककर समस्या पैदा करने की कोशिश अधिक दिखाई दे रही है।
उन्होंने विशेष रूप से जिरानिया और मोहनपुर उपमंडलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं अधिक देखने को मिल रही हैं। इसके अलावा कुछ अन्य इलाकों में भी छोटी-मोटी समस्याएं सामने आने की बात उन्होंने कही।
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि वह पार्टी कार्यालय जाकर स्थिति की जानकारी लेंगे और आवश्यक तथ्य जुटाएंगे। इसलिए इस समय पूरे मामले पर अंतिम रूप से कुछ कहना संभव नहीं है।
माणिक सरकार ने दावा किया कि लोगों के रुख में भी बदलाव आया है। विभिन्न प्रकार की बाधाओं के बावजूद लोग चुनावी मुकाबले में हिस्सा लेने के लिए साहस और सकारात्मकता के साथ आगे आने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता।
सत्तारूढ़ दल पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि शासक दल भयभीत और आशंकित है, इसलिए वह अकेले चुनाव लड़ने का साहस नहीं दिखा पा रहा है।
उन्होंने कहा कि सभी तरह की बाधाओं का सामना करते हुए वामपंथियों को आगे बढ़ना होगा। उनके शब्दों में, “यह एक लड़ाई है।”
