अगरतला, 1 सितंबर: प्रोफेसर डॉ. नचिकेता मित्तल के खिलाफ त्रिपुरा मानवाधिकार आयोग द्वारा शुरू की गई कार्यवाही पर त्रिपुरा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। आयोग के 14 अगस्त 2026 के आदेश को चुनौती देते हुए डॉ. मित्तल की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने यह निर्देश दिया।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति विश्वजीत पालित की खंडपीठ ने की। याचिका में डॉ. मित्तल ने मानवाधिकार आयोग द्वारा शुरू की गई कार्यवाही के साथ-साथ 14 अगस्त के आदेश की वैधता को भी चुनौती दी थी। उक्त आदेश में उनके खिलाफ विभिन्न कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे।
मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने त्रिपुरा मानवाधिकार आयोग को नोटिस जारी किया। साथ ही आयोग के समक्ष चल रही सभी कार्यवाहियों तथा 14 अगस्त के आदेश के आधार पर उठाए गए या उठाए जाने वाले सभी आगामी कदमों पर भी रोक लगा दी।
डॉ. मित्तल के नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, त्रिपुरा में कार्यरत रहने के दौरान उनके खिलाफ लगाए गए विभिन्न आरोपों के आधार पर मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज की गई थी।
आयोग के अंतरिम आदेश में जांच शाखा की रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आरोपों को लेकर प्रारंभिक निष्कर्ष दर्ज किए गए थे। आयोग के निर्देशों में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में डॉ. मित्तल की नियुक्ति के संबंध में कार्रवाई की सिफारिश भी शामिल थी।
आयोग की रिपोर्ट में डॉ. मित्तल के खिलाफ कथित अनुचित व्यवहार और यौन उत्पीड़न से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, त्रिपुरा में उनके कार्यकाल के दौरान के माहौल को आयोग ने “दुर्भाग्यपूर्ण, अवांछित और अन्यायपूर्ण” बताया था।
हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद 14 अगस्त के मानवाधिकार आयोग के आदेश को लागू करने तथा उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित रहेगी। रिट याचिका पर होने वाली अगली सुनवाई और अदालत के अंतिम निर्णय के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होगी।
डॉ. नचिकेता मित्तल की ओर से अधिवक्ता शंकर लोध ने अदालत में पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान मानवाधिकार आयोग अथवा अन्य प्रतिवादियों की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं था।
