DGP अनुराग धनकर की मौत पर चर्चा की मांग, विधानसभा के वेल में उतरे CPI(M) विधायक

अगरतला, 28 अगस्त: त्रिपुरा के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग धनकर की मौत के मुद्दे पर विधानसभा में चर्चा की अनुमति नहीं मिलने के विरोध में शुक्रवार को मुख्य विपक्षी दल CPI(M) के विधायक सदन के वेल में उतर आए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष ने DGP की मौत की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। विपक्ष की मांग है कि मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) या त्रिपुरा हाईकोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश से कराई जाए।

शुक्रवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद स्पीकर रामपदा जमातिया द्वारा बधाई प्रस्ताव पढ़े जाने के दौरान विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी ने DGP अनुराग धनकर की मौत का मुद्दा उठाया। उन्होंने गुरुवार को मुख्यमंत्री प्रो. डॉ. माणिक साहा द्वारा विधानसभा में दिए गए स्वतःस्फूर्त बयान का भी उल्लेख किया।

जितेंद्र चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने गुरुवार को DGP की मौत के संबंध में आखिरकार बयान दिया। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण पद पर रहे अधिकारी की मौत जैसे गंभीर मामले को पूरी पारदर्शिता के साथ सामने लाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में घटना की सच्चाई सामने लाना चाहती है, तो मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया जाना चाहिए या जांच की जिम्मेदारी त्रिपुरा हाईकोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश को सौंपी जानी चाहिए।

हालांकि, स्पीकर रामपदा जमातिया ने विपक्ष की मांग को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने विधानसभा के नियम 361 का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के स्वतःस्फूर्त बयान से संबंधित विषय पर सदस्य अलग से चर्चा शुरू नहीं कर सकते। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन की कार्यवाही निर्धारित नियमों के अनुसार ही संचालित होगी।

स्पीकर के इस रुख के बाद विपक्षी विधायकों के माइक्रोफोन बंद कर दिए गए। इसके विरोध में CPI(M) विधायक अपनी सीटों से उठकर विधानसभा के वेल में पहुंच गए। उन्होंने नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया और DGP की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग उठाई।

बाद में मुख्यमंत्री माणिक साहा ने विधानसभा में जांच से संबंधित जानकारी साझा करने के सरकार के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जनता के हित और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए ही उन्होंने मामले से संबंधित जानकारी सदन के सामने रखी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर अनुराग धनकर की मौत प्रथम दृष्टया आत्महत्या प्रतीत होती है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 194 का भी उल्लेख किया और कहा कि विधायकों को अपने विधायी कार्यों के दौरान कुछ संवैधानिक अधिकार और विशेषाधिकार प्राप्त हैं।

माणिक साहा ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस जांच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों का हिस्सा होती है। इसलिए कानूनी प्रावधानों के तहत उचित समय पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट से संबंधित जानकारी विधानसभा में रखी जा सकती है।

उन्होंने कहा कि जनता के हित और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने मामले की जानकारी सभी के सामने रखी। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित जांच से जुड़े अन्य प्रासंगिक दस्तावेज विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत किए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हाई-प्रोफाइल मामलों में मुख्यमंत्री या गृह मंत्री अक्सर जांच की प्रगति और उन तथ्यों के बारे में विधानसभा में बयान देते हैं, जिन्हें उस समय कानूनी रूप से सार्वजनिक किया जा सकता है।

हालांकि, मुख्यमंत्री के स्पष्टीकरण के बाद भी विपक्ष अपने रुख पर कायम रहा। CPI(M) ने अनुराग धनकर की मौत की परिस्थितियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। विपक्ष ने मामले की जांच SIT या त्रिपुरा हाईकोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश से कराने की मांग की है।

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