पेरिस, 17 अगस्त (आईएएनएस): बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की पुण्यतिथि के अवसर पर निजी प्रार्थना और स्मरण सभा में शामिल होने के बाद चटगांव जिला बार एसोसिएशन से जुड़े 15 वकीलों की गिरफ्तारी को लेकर एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने बांग्लादेश के अधिकारियों की कड़ी आलोचना की है। गिरफ्तार वकीलों में पांच महिलाएं शामिल हैं। बताया गया है कि उनके खिलाफ बांग्लादेश के आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है।
बांग्लादेश पुलिस ने शनिवार रात चटगांव के डबल मूरिंग इलाके में एक घर से इन 15 वकीलों को गिरफ्तार किया। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार वकील अवामी लीग के कार्यकर्ता और समर्थक हैं तथा वे बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की पुण्यतिथि मनाने के लिए वहां एकत्र हुए थे।
रविवार दोपहर पांच महिला वकीलों को अदालत से जमानत मिल गई। हालांकि, बाकी 10 वकीलों की जमानत याचिका खारिज कर उन्हें जेल भेज दिया गया।
बांग्लादेशी समाचार पत्र ‘प्रथम आलो’ से डबल मूरिंग थाने के ओसी शाहीन आलम ने कहा कि गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने अभियान चलाकर 15 लोगों को गिरफ्तार किया। बाद में उनके खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज कर उन्हें अदालत में पेश किया गया।
बांग्लादेश में 15 अगस्त को राष्ट्रीय शोक दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की हत्या की याद में मनाया जाता रहा है। 15 अगस्त 1975 को शेख मुजीबुर रहमान और उनके परिवार के कई सदस्यों की हत्या कर दी गई थी।
शांतिपूर्ण और निजी स्मरण सभा के संबंध में आतंकवाद विरोधी कानून के इस्तेमाल को बेहद चिंताजनक बताते हुए अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जेएमबीएफ ने इसकी आलोचना की है। संगठन का कहना है कि यदि गिरफ्तार वकीलों के किसी हिंसक गतिविधि या वास्तविक आतंकवादी गतिविधि से जुड़े होने का कोई सबूत नहीं है, तो उनकी गिरफ्तारी मनमाने हिरासत, उचित कानूनी प्रक्रिया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा और संगठन के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
जेएमबीएफ के अनुसार, शांतिपूर्ण तरीके से किसी व्यक्ति को याद करना, शोक व्यक्त करना, अपनी राय रखना या किसी राजनीतिक विचारधारा से जुड़ना अपने आप में ‘आतंकवाद’ नहीं माना जा सकता। संगठन ने कहा कि ऐसे शांतिपूर्ण कार्यों के खिलाफ असाधारण आपराधिक कानूनों का इस्तेमाल मौलिक अधिकारों, वकीलों की पेशेवर स्वतंत्रता और कानून के शासन को कमजोर कर सकता है।
जेएमबीएफ के संस्थापक अध्यक्ष और मानवाधिकार अधिवक्ता शहनूर इस्लाम ने कहा कि चटगांव में 15 वकीलों की गिरफ्तारी कोई अलग-थलग घटना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बांग्लादेश में वकीलों, पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं तथा विपक्षी राजनीतिक दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन और दमन की व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है।
उन्होंने दावा किया कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पूर्व अंतरिम सरकार के दौरान यह प्रवृत्ति और तेज हुई थी तथा वर्तमान में नवगठित बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सरकार के कार्यकाल में भी इसके जारी रहने के आरोप सामने आ रहे हैं।
शहनूर इस्लाम ने कहा कि किसी घटना को शांतिपूर्ण तरीके से याद करना, प्रार्थना करना, राजनीतिक विचार व्यक्त करना या किसी राजनीतिक दल से जुड़ा होना अपने आप में आतंकवाद नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण गतिविधियों के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानूनों का इस्तेमाल कानून के शासन को कमजोर करता है, लोकतांत्रिक और नागरिक क्षेत्र को सीमित करता है तथा लोगों में भय का माहौल पैदा करता है।
उन्होंने बांग्लादेश सरकार से वकीलों, पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक विपक्ष और शांतिपूर्ण नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद विरोधी तथा आपराधिक कानूनों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल को रोकने का आग्रह किया।
साथ ही, जेएमबीएफ ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, बांग्लादेश में तैनात विभिन्न देशों के राजनयिक मिशनों, अंतरराष्ट्रीय बार एसोसिएशन, वकील संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से इस मामले पर नजर रखने की अपील की है।
संगठन ने गिरफ्तार वकीलों की रिहाई के लिए बांग्लादेशी अधिकारियों पर दबाव बनाने के साथ-साथ देश के सभी वकीलों के अधिकार, स्वतंत्रता, गरिमा और पेशेवर स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया है।
