घरेलू सरजमीं पर विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में पदक पर भारत की नजर, सिंधु-आयुष पर खास निगाहें

नई दिल्ली, 16 अगस्त (आईएएनएस): दुनिया के शीर्ष बैडमिंटन सितारों की मौजूदगी में 17 से 23 अगस्त तक दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में बीडब्ल्यूएफ विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप 2026 का आयोजन होने जा रहा है। भारत दूसरी बार इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी कर रहा है और 2009 के बाद पहली बार देश की धरती पर विश्व चैंपियनशिप आयोजित की जा रही है।

पिछले एक दशक से अधिक समय से विश्व चैंपियनशिप में भारतीय शटलर पदक के प्रमुख दावेदार रहे हैं। भारत ने 2011 के बाद से हर संस्करण में कम से कम एक पदक जीता है। 1977 में पहली बार आयोजित इस प्रतियोगिता में भारत को 1983 में प्रकाश पादुकोण ने पहला पदक दिलाया था। इसके बाद 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की महिला युगल जोड़ी ने 28 साल के पदक सूखे को खत्म किया।

2011 के बाद भारत ने लगातार 11 संस्करणों में कम से कम एक पदक जीता है। इस दौरान देश के खाते में कुल 14 पदक आए हैं। इस निरंतरता के मामले में भारत की तुलना केवल चीन से की जा सकती है। अब तक 11 भारतीय शटलरों ने विश्व चैंपियनशिप में कुल 15 पदक जीते हैं। इनमें केवल पीवी सिंधु ही 2019 में विश्व चैंपियन बनने में सफल रही हैं।

इस बार भारत की सबसे बड़ी उम्मीदों में पीवी सिंधु शामिल हैं। महिला एकल में विश्व चैंपियनशिप के सबसे ज्यादा पदकों की संयुक्त रिकॉर्डधारी सिंधु अपने छठे पदक के लक्ष्य के साथ उतरेंगी। पहले दौर में उनका सामना आयरलैंड की विश्व रैंकिंग में 141वें स्थान पर मौजूद सोफिया नोबल से होगा। दूसरे दौर में उनका मुकाबला बुल्गारिया की स्टेफानी स्टोएवा या कनाडा की वान यू झांग से हो सकता है।

सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए सिंधु को तीसरी वरीय वांग झी यी और छठी वरीय पुतरी कुसुमा वारदानी जैसी कड़ी प्रतिद्वंद्वियों की चुनौती पार करनी पड़ सकती है। हालांकि टूर्नामेंट से पहले सिंधु शानदार फॉर्म में हैं। उन्होंने हाल ही में जापान ओपन सुपर 750 का खिताब जीतकर अपना आत्मविश्वास बढ़ाया है। 2019 की विश्व चैंपियनशिप जीत के बाद यह उनका सबसे उल्लेखनीय खिताबों में से एक है।

महिला एकल में इस बार पांच विश्व चैंपियनों को वरीयता दी गई है। शीर्ष वरीय 2023 की चैंपियन आन से-यंग हैं। दूसरी वरीयता तीन बार की विश्व चैंपियन और मौजूदा चैंपियन अकाने यामागुची को मिली है। इसके अलावा 2013 की चैंपियन रत्चानोक इंतानोन सातवीं, सिंधु नौवीं और 2017 की चैंपियन नोजोमी ओकुहारा 11वीं वरीयता पर हैं।

पुरुष एकल में भारत की उम्मीदें लक्ष्य सेन और आयुष शेट्टी पर टिकी होंगी। 14वीं वरीयता प्राप्त लक्ष्य इस सत्र में ऑल इंग्लैंड के फाइनल में पहुंचने के दौरान दिखाई गई शानदार फॉर्म को दोहराना चाहेंगे। क्वार्टर फाइनल से पहले के दौर में उनका संभावित मुकाबला ओलंपिक रजत पदक विजेता और पूर्व विश्व चैंपियन कुनलावुत वितिदसर्न से हो सकता है।

वहीं, 21 वर्षीय आयुष शेट्टी के सामने घरेलू मैदान पर विश्व चैंपियनशिप के पदार्पण में ही कड़ी चुनौती होगी। पहले मुकाबले में उनका सामना मौजूदा चैंपियन और शीर्ष वरीय चीन के शी यू ची से होगा। चीनी स्टार के खिलाफ अब तक खेले तीनों मुकाबलों में आयुष को हार का सामना करना पड़ा है। हाल ही में एशियाई चैंपियनशिप के फाइनल में भी वह शी यू ची से हार गए थे।

पुरुष एकल में तीन विश्व चैंपियन खिलाड़ी वरीयता सूची में शामिल हैं—मौजूदा चैंपियन शी यू ची, 2023 के चैंपियन कुनलावुत वितिदसर्न और 2021 के चैंपियन लोह कीन यू।

पुरुष युगल में भारत की सबसे बड़ी पदक उम्मीद सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी से है। 2025 की विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली इस जोड़ी को इस साल चोट और मैच के बीच हटने की समस्या का सामना करना पड़ा है। इसके बावजूद बड़े मंच पर उनका अनुभव और सफलता भारत की पदक संभावनाओं को मजबूत बनाती है।

पांचवीं वरीयता प्राप्त सात्विक-चिराग को पहले दौर में बाई मिली है। दूसरे दौर में भी उनका मुकाबला अपेक्षाकृत आसान रहने की उम्मीद है। हालांकि तीसरे दौर में 12वीं वरीय रेमंड इंद्रा और निकोलस जोआकिम के खिलाफ उन्हें कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ सकता है। इससे पहले भारतीय जोड़ी का इन खिलाड़ियों से मुकाबला नहीं हुआ है।

महिला युगल में चोट से उबरने के बाद त्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद फिर कोर्ट पर उतरेंगी। कभी विश्व की शीर्ष 10 जोड़ियों में शामिल रही यह जोड़ी अपने पुराने लय और प्रदर्शन को हासिल करने के लक्ष्य के साथ उतरेगी।

मिश्रित युगल में भारत के सामने चुनौती और कठिन होगी। ध्रुव कपिला और तनिषा क्रास्टो ने पिछले संस्करण में पांचवीं वरीय जोड़ी को हराकर बड़ा उलटफेर किया था। इस बार तीसरे दौर में उनका सामना छठी वरीय गुओ शिनवा और चेन फांगहुई की जोड़ी से होने की संभावना है। गौरतलब है कि विश्व चैंपियनशिप के मिश्रित युगल में भारत ने अब तक कोई पदक नहीं जीता है।

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