प्रख्यात शिक्षाविद् और पूर्व राज्यपाल डी.वाई. पाटिल का निधन, प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक

कोल्हापुर, 4 अगस्त (आईएएनएस): महाराष्ट्र के प्रख्यात शिक्षाविद्, समाजसेवी तथा बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव (डी.वाई.) पाटिल का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद कोल्हापुर में निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे।

डी.वाई. पाटिल 1960 और 1970 के दशक में महाराष्ट्र के विधायक रहे। बाद में उन्होंने बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दीं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1991 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। सोशल मीडिया मंच एक्स पर उन्होंने लिखा कि डी.वाई. पाटिल समाज सेवा और विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी रहे। उन्होंने हमेशा गरीब और जरूरतमंद लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कार्य किया। प्रधानमंत्री ने उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवार और उनके शुभचिंतकों के प्रति संवेदना प्रकट की।

डी.वाई. पाटिल के निधन की खबर फैलते ही कोल्हापुर के कसबा बावड़ा स्थित उनके आवास पर अंतिम श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, शिक्षाविदों, समाजसेवियों और आम नागरिकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

22 अक्टूबर 1935 को कोल्हापुर के अंबाप गांव में जन्मे डी.वाई. पाटिल ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी। बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति छोड़कर शिक्षा के क्षेत्र में स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर दिया। महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों में स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अस्पतालों का व्यापक नेटवर्क स्थापित करने का श्रेय उन्हें जाता है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पूर्व राज्यपाल, प्रख्यात शिक्षाविद् और समाजसेवी डॉ. डी.वाई. पाटिल का निधन अत्यंत दुखद है। शिक्षा और जनसेवा के क्षेत्र में उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा। राहुल गांधी ने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं भी व्यक्त कीं।

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