पुणे, 1 अगस्त (आईएएनएस): राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने शनिवार को युवाओं से स्वतंत्रता का सही अर्थ समझने और अपने व्यक्तिगत सपनों को राष्ट्रहित से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सच्ची स्वतंत्रता केवल अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने में नहीं, बल्कि देश के निर्माण, विकास और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने में निहित है।
लोकमान्य तिलक स्मारक ट्रस्ट द्वारा आयोजित समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक पुरस्कार प्राप्त करने के बाद डोभाल ने यह बात कही।
उन्होंने कहा, “आज के कई युवा मानते हैं कि स्वतंत्रता का अर्थ सिर्फ अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी करना है, लेकिन स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ कभी इतना सीमित नहीं था।”
डोभाल ने कहा कि जब ब्रिटिश शासन के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने का साहस बहुत कम लोगों में था, तब लोकमान्य तिलक ने संघर्ष का कठिन मार्ग चुना और देश का नेतृत्व किया। उन्होंने युवाओं से तिलक के राष्ट्र निर्माण के दृष्टिकोण पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।
लोकमान्य तिलक के प्रसिद्ध नारे “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा” का उल्लेख करते हुए डोभाल ने कहा कि यदि तिलक आज जीवित होते तो कहते, “हमने स्वराज प्राप्त कर लिया है, अब भारत को मजबूत और विकसित बनाना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।”
उन्होंने कहा कि देश की प्रगति के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता, अनुशासन और त्याग आवश्यक है। जो भी कार्य राष्ट्रहित के खिलाफ होगा, वह अंततः प्रत्येक नागरिक के हित के भी विरुद्ध होगा।
डोभाल ने अपने छात्र जीवन की यादें साझा करते हुए बताया कि उनकी शुरुआती पढ़ाई का एक हिस्सा पुणे में हुआ था। उन्होंने स्कूल की प्रार्थना सभाओं और चतुर्शृंगी मंदिर के दर्शन की स्मृतियों का भी उल्लेख किया और लोकमान्य तिलक के नाम पर स्थापित पुरस्कार प्राप्त करने को अपने लिए अत्यंत सम्मान और विनम्रता का विषय बताया।
उन्होंने पुणे की ऐतिहासिक विरासत को नमन करते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज, पेशवा बाजीराव, तानाजी मालुसरे, मुरारबाजी देशपांडे, गोपाल कृष्ण गोखले, गोपाल गणेश आगरकर, महर्षि कर्वे और सेनापति बापट जैसी महान विभूतियों को याद किया।
महाराष्ट्र में प्लेग महामारी के दौरान लोकमान्य तिलक के योगदान का उल्लेख करते हुए डोभाल ने कहा कि अपने 21 वर्षीय पुत्र विश्वनाथ की मृत्यु के बावजूद तिलक ने पुणे नहीं छोड़ा और समाज सेवा जारी रखी। उन्होंने जेल की सजा भी झेली, लेकिन अपने सामाजिक और राष्ट्रीय कर्तव्यों से कभी पीछे नहीं हटे।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलते हुए डोभाल ने कहा कि भारत आज भी आंतरिक और बाहरी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में पूरे समाज को एकजुट होकर राष्ट्र की सुरक्षा और प्रगति के लिए कार्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “जो राष्ट्रहित में नहीं है, वह हमारे हित में भी नहीं हो सकता। यदि हमारा कोई कदम देश को नुकसान पहुंचाता है, तो हमें उस रास्ते पर नहीं चलना चाहिए।”
डोभाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं अमित शाह की राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता और समर्पण को करीब से देखा है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र सेवा का संकल्प लेने और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
समारोह के अंत में अजीत डोभाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सम्मान ने उन्हें अत्यंत विनम्र और भावुक कर दिया है तथा इसके लिए शब्दों में कृतज्ञता व्यक्त करना संभव नहीं है।
