प्रधानमंत्री मोदी ने उत्पादकता और निर्यात बढ़ाने के लिए विविध जलवायु का पूर्ण उपयोग करने पर दिया जोर

नईदिल्ली, 7 मार्च : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्पादकता और निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए भारत की विविध जलवायु परिस्थितियों का पूर्ण उपयोग करने की आवश्यकता पर बल दिया है। प्रधानमंत्री ने कल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘कृषि और ग्रामीण परिवर्तन’ से संबंधित वेबिनार को संबोधित करते हुए देश के कृषि उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उच्च मूल्य की फसलों के उत्पादन को बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने वैश्विक मांग में हो रहे बदलाव और भारतीय कृषि क्षेत्र को निर्यात प्रमुख बनाने की आवश्यकता का उल्लेख किया।

श्री मोदी ने वैश्विक गुणवत्ता और ब्रांडिंग मानकों को पूरा करने के लिए विशेषज्ञों, उद्योग और किसानों को शामिल करते हुए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया और स्थानीय किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने के महत्व पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि निर्यात-उन्मुख उत्पादन से प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के माध्यम से ग्रामीण रोजगार सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के केंद्रीय बजट में काजू, कोको, चंदन सहित उच्च मूल्य वाली कृषि पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है और खाद्य तेल, दालों और प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन कृषि के सभी क्षेत्रों को मजबूत कर रहे हैं। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो रही है, जिसमें समग्र स्वास्थ्य देखभाल और जैविक भोजन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मत्स्य पालन क्षेत्र पर बोलते हुए श्री मोदी ने कहा कि भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में विभिन्न जलाशयों और तालाबों में लगभग साढ़े चार लाख टन मछली का उत्पादन हो रहा है, जबकि अतिरिक्त 20 लाख टन उत्पादन की संभावना है। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन निर्यात वृद्धि का एक प्रमुख मंच भी बन सकता है। श्री मोदी ने ब्लू इकोनोमी की क्षमता को साकार करने के लिए हैचरी, चारा और रसद में नए व्यावसायिक मॉडलों की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने मत्स्य विभाग और स्थानीय समुदायों के बीच मजबूत समन्वय को प्रोत्साहित किया। उन्होंने जोखिम कम करने के लिए एकल फसल पर निर्भरता के बजाय फसल विविधीकरण पर जोर दिया और खाद्य तेलों, दालों और प्राकृतिक खेती के लिए चलाए जा रहे अभियानों को इस क्षेत्र की मजबूती बढ़ाने के साधन के रूप में बताया।

प्रधानमंत्री ने ई-एन.ए.एम. और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के विकास का उल्लेख करते हुए कृषि में प्रौद्योगिकी संस्कृति का जिक्र किया। उन्होंने किसान पहचान पत्र जारी करने और डिजिटल भूमि सर्वेक्षण को परिवर्तनकारी कदम बताया। श्री मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वामित्व योजना, पीएम ग्रामीण सड़क योजना और स्वयं सहायता समूहों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लगातार मजबूत किया है।

श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने तीन करोड़ लखपति दीदियों को सृजित करने का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है और देश ने 2029 तक तीन करोड़ और लखपति दीदियों को जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

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