बंबई उच्च न्यायालय ने नमाज़ अदा करने के लिए मुंबई के घरेलू हवाई अड्डे पर अस्थायी जगह की मांग वाली याचिका खारिज की

बंबई उच्च न्यायालय ने रमज़ान के पवित्र महीने में नमाज़ अदा करने के लिए मुंबई के घरेलू हवाई अड्डे पर अस्थायी जगह की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है।

टैक्सी-रिक्शा ओला-उबर एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका में हवाई अड्डे के टर्मिनल-एक के पास ध्वस्त किए गए प्रार्थना स्थल को बहाल करने या रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान नमाज़ के लिए एक हजार 500 वर्ग फुट की वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।

गुरुवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए याचिका का विरोध किया।

अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने कहा कि घरेलू टर्मिनल एक उच्च सुरक्षा वाला अधिक आवाजाही वाला क्षेत्र है जहां महत्वपूर्ण लोगों का अक्सर आना-जाना रहता है, इसलिए ऐसी अस्थायी संरचनाओं की अनुमति नहीं दी जा सकती।

उन्होंने पीठ को बताया कि ड्राइवरों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पार्किंग क्षेत्र से पैदल दूरी के भीतर कम से कम तीन कार्यरत मस्जिदें हैं।

मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम नानकानी ने कहा कि ध्वस्त किया गया प्रार्थना स्थल वीआईपी प्रवेश द्वार के पास था और इसलिए संभावित सुरक्षा जोखिम पैदा करता है।

अदालत ने ड्राइवरों को हुई असुविधा को स्वीकार करते हुए कहा कि वह वर्तमान सुरक्षा आकलन को नजरअंदाज नहीं कर सकती। हालांकि न्यायमूर्ति बीपी कोलाबावाला और एफपी पूनीवाला की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को पुनर्विकसित सुविधा में स्थान के लिए एमआईएएल और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण से संपर्क करने को कहा।

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