काठमांडू, 9 सितंबर: नेपाल में सोशल मीडिया प्रतिबंध के विरोध में शुरू हुए ‘जेनरेशन जी’ आंदोलन ने जबरदस्त उग्र रूप ले लिया है। देशभर में फैली व्यापक हिंसा और जनदबाव के चलते प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। राजधानी काठमांडू में प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय पर धावा बोलने और सरकार विरोधी नारेबाजी के बाद हालात और बिगड़ गए। इसके बाद जब ओली के निजी निवास बालकोट में आग लगा दी गई, तब उन्होंने पद छोड़ने की घोषणा की। पुलिस की फायरिंग में कम से कम 19 लोगों की मौत और सैकड़ों घायल होने की खबर है।
सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए मंगलवार रात सोशल मीडिया पर लगाया गया प्रतिबंध हटा लिया, लेकिन इससे आंदोलन की तीव्रता में कोई कमी नहीं आई। देश के कई हिस्सों में हिंसा जारी रही। प्रदर्शनकारियों ने मंत्रियों के आवासों पर हमला किया, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया और पुलिस वाहनों में आग लगा दी। इस दौरान वित्त मंत्री विष्णु प्रसाद पौडेल को भी भीड़ ने घेर लिया और लात-घूंसे मारे। प्रदर्शन के दबाव में कम से कम चार अन्य मंत्रियों ने भी इस्तीफ़ा दे दिया, जिनमें संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुङ और कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी शामिल हैं।
73 वर्षीय ओली, जो नेपाल की राजनीति में एक मजबूत और अनुभवी नेता माने जाते हैं, आखिरकार युवा आंदोलन की तीव्रता के आगे झुकने को मजबूर हुए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का फैसला ही आंदोलन की चिंगारी बना और यही सरकार के पतन का मुख्य कारण बना। आंदोलनकारियों ने पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक और माओवादी नेता पुष्प कमल दाहाल के आवास पर भी हमला किया, हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के घर की सुरक्षा की गई।
सरकार द्वारा कई जिलों में कर्फ्यू लगाने के बावजूद हिंसा पर काबू नहीं पाया जा सका। काठमांडू के न्यू बानेश्वर, कालांकी चौक और रौतहाट जिले के चंद्रनिगाहापुर जैसे क्षेत्रों में भीड़ ने कर्फ्यू को अनदेखा कर विरोध जारी रखा। कांग्रेस नेता गगन थापा ने सरकार की गोलीबारी की नीति की कड़ी आलोचना की और पीएम ओली को मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए इस्तीफ़ा देने की मांग की थी।
इसी बीच, मंगलवार शाम को ओली ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई और राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि सोशल मीडिया प्रतिबंध सरकार की दूरदर्शिता को लेकर फैली गलतफहमी का परिणाम था। उन्होंने मारे गए नागरिकों के प्रति शोक व्यक्त किया और हिंसा की घटनाओं की जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने की घोषणा की।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने नेपाल में रह रहे भारतीय नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। साथ ही, भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दार्जिलिंग, बिहार, उत्तर प्रदेश, सिक्किम और उत्तराखंड की सीमाओं पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने चौकसी कड़ी कर दी है।
नेपाल में यह ताजा राजनीतिक संकट बीते 17 वर्षों में हुए 14 सरकार परिवर्तनों की कड़ी में एक और अध्याय जोड़ता है। देश की गहराती अस्थिरता को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर भारत, गहरी चिंता जता रहा है और शांति बहाली की उम्मीद कर रहा है।
