Air Force : सेना और वायु सेना के लिए पांच परियोजनाओं को मिली रक्षा मंत्रालय की सैद्धांतिक मंजूरी

नई दिल्ली, 03 मार्च (हि.स.)। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय उद्योग को सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ सेना और वायुसेना के संचार उपकरणों के लिए लाइट टैंक, ग्राउंड-आधारित सिस्टम और एयरबोर्न स्टैंड-ऑफ जैमर परियोजनाओं के साथ एयरबोर्न इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल पॉड सहित 4 परियोजनाओं के लिए गुरुवार को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। सरकार के इस कदम से देश में इन परियोजनाओं के स्वदेशी विकास से भारतीय रक्षा उद्योग की डिजाइन क्षमताओं का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। इन प्रौद्योगिकियों से भारत डिजाइन दिग्गज के रूप में स्थापित हो सकेगा।

‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत रक्षा मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 की मेक-I श्रेणी के तहत डिजाइन और विकास के लिए भारतीय उद्योग की चार परियोजनाओं की पेशकश की है। उद्योग को इन परियोजनाओं के प्रोटोटाइप विकास के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। रक्षा मंत्रालय की कॉलेजिएट कमेटी ने जिन परियोजनाओं को ‘सैद्धांतिक रूप से मंजूरी’ (एआईपी) दी गई है, उनमें भारतीय वायु सेना के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ संचार उपकरण राउटर, स्विच, एन्क्रिप्टर्स, वीओआईपी फोन और उनके सॉफ्टवेयर हैं। इसके अलावा भू-आधारित प्रणाली के साथ एयरबोर्न इलेक्ट्रो ऑप्टिकल पॉड, एयरबोर्न स्टैंड-ऑफ जैमर परियोजना है।

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 की मेक-I श्रेणी के तहत भारतीय सेना के लिए हल्के टैंक परियोजना को भी सैद्धांतिक मंजूरी मिली है। रक्षा उद्योग के अनुकूल डीएपी-2020 के लॉन्च के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि भारतीय उद्योग को भारतीय सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ लाइट टैंक और संचार उपकरण जैसे बड़े टिकट प्लेटफॉर्म के विकास में शामिल किया गया है। इसके अलावा वित्त पोषित मेक-II प्रक्रिया के तहत पांच परियोजनाओं के लिए एआईपी भी प्रदान किया गया है।

इसमें भारतीय वायु सेना के लिए अपाचे हेलीकॉप्टर के लिए पूर्ण गति सिम्युलेटर, चिनूक हेलीकॉप्टर के लिए पूर्ण गति सिम्युलेटर, विमान रखरखाव के लिए पहनने योग्य रोबोटिक उपकरण शामिल हैं। इसी तरह भारतीय सेना के लिए यंत्रीकृत बलों के लिए एकीकृत निगरानी और लक्ष्यीकरण प्रणाली, स्वायत्त लड़ाकू वाहन को शामिल किया गया है। ‘मेक-II’ श्रेणी के तहत परियोजनाओं में प्रोटोटाइप विकास उद्देश्यों के लिए कोई सरकारी वित्त पोषण नहीं दिया जाएगा।