अगरतला, 22 अक्टूबर: आगामी अगरतला नगर निगम सहित राज्य के अन्य शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए वामपंथी संगठनों ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग की है। इस संबंध में वाम प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर कई मांगें रखीं। बैठक के बाद वाम नेताओं ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों की प्रासंगिकता को स्वीकार करते हुए सकारात्मक रुख अपनाया और आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया।
गुरुवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पूर्व मंत्री तथा वाम मोर्चा के संयोजक माणिक डे ने कहा कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले मुख्यमंत्री के समक्ष मांगें रखने का मुख्य उद्देश्य प्रशासन को तैयारियों के लिए पर्याप्त समय देना है। उन्होंने मांग की कि प्रत्येक मतदान केंद्र पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाए। साथ ही, विपक्षी उम्मीदवारों को बिना किसी बाधा के नामांकन पत्र दाखिल करने, चुनाव प्रचार करने और मतदाताओं को निर्भय होकर अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अवसर सुनिश्चित किया जाए।
माणिक डे ने कहा कि मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बलों की तैनाती के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री ने माना कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने में केंद्रीय बलों की मौजूदगी सहायक हो सकती है। हालांकि, केंद्रीय बलों की तैनाती का अंतिम निर्णय केंद्र सरकार पर निर्भर करता है। वाम नेताओं के दावे के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों और चुनाव आयोग से संपर्क करने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद सुरक्षा का मुद्दा उठाने पर प्रशासन को तैयारियों के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल सकता। इसलिए पहले से ही आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया गया है। वाम प्रतिनिधियों ने मांग की कि केंद्रीय बलों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक मतदान केंद्र पर उनकी तैनाती की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा, मतदान से कम से कम सात दिन पहले संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और नियमित गश्त सुनिश्चित करने की मांग भी की गई।
बैठक के दौरान वाम प्रतिनिधिमंडल ने टीटीएएडीसी और ग्राम समिति चुनावों के अनुभवों का भी उल्लेख किया। उनका दावा है कि उन चुनावों में अधिकांश मतदान केंद्रों पर मतदान एजेंट उपस्थित रह सके और मतदान समाप्त होने के बाद सुरक्षित अपने घर लौट पाए। कुछ छिटपुट घटनाओं के बावजूद केंद्रीय बलों की मौजूदगी से स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली थी। वाम नेताओं का तर्क है कि नगर निकाय चुनाव अपेक्षाकृत छोटे भौगोलिक क्षेत्र में होते हैं, इसलिए सुनियोजित सुरक्षा व्यवस्था के जरिए उम्मीदवारों और मतदाताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
चुनावी सुरक्षा के अलावा वाम प्रतिनिधिमंडल ने अगरतला और आसपास के क्षेत्रों की नागरिक समस्याओं की ओर भी मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया। विशेष रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण और विस्तार के कारण विभिन्न बाजारों के अस्तित्व तथा व्यापारिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई। रानीरबाजार सहित अन्य बाजार क्षेत्रों को राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से होने वाले संभावित नुकसान से बचाने के लिए वैकल्पिक योजना तैयार करने की मांग की गई।
माणिक डे ने कहा कि बाजार क्षेत्रों को यथासंभव बचाते हुए बाईपास निर्माण की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों और अधिकारियों के साथ चर्चा करने के अलावा दिल्ली में संबंधित पक्षों से संपर्क कर संभावित समाधान तलाशने की बात कही है।
वाम नेताओं ने बताया कि पूरी चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही और उन्होंने उनकी बातों को गंभीरता से सुना। हालांकि, नगर निकाय चुनाव में केंद्रीय बलों की तैनाती सहित अन्य मांगों पर अभी तक किसी अंतिम निर्णय की जानकारी नहीं मिली है। अब चुनाव से पहले प्रशासन इन मांगों के संबंध में क्या कदम उठाता है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।
