शांता कुमार की केंद्र सरकार से क्रीमीलेयर को आरक्षण के दायरे से बाहर करने के लिए नियम बनाने की मांग

शिमला, 15 अक्टूबर (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने केंद्र सरकार और विपक्ष से मांग की है कि आरक्षित जातियों के गरीब परिवारों को आरक्षण का लाभ सुनिश्चित करने के लिए जल्द नियम बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय भी कई बार आरक्षित वर्गों में क्रीमीलेयर यानी संपन्न लोगों को आरक्षण के लाभ से बाहर करने की बात कह चुका है। इसके बावजूद इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

शांता कुमार ने वीरवार को एक बयान में कहा कि देश में कई वर्षों से आरक्षित जातियों को विभिन्न सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि इन सुविधाओं का अधिक लाभ उन्हीं जातियों के प्रभावशाली और संपन्न लोग उठा रहे हैं। दूसरी ओर, उन्हीं जातियों के कई परिवार आज भी भयंकर गरीबी में जीवन जीने को मजबूर हैं।

उन्होंने एक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि एक परिवार में पति-पत्नी दोनों आईएएस अधिकारी बन गए, लेकिन उनके बेटे को भी आरक्षण का लाभ मिल गया। जबकि उसी गांव में संबंधित जाति के कई गरीब परिवार मौजूद थे। यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा।

शांता कुमार के अनुसार इस मामले में न्यायालय ने भी हैरानी जताई और केंद्र सरकार से आरक्षित वर्गों के संपन्न लोगों को आरक्षण के लाभ से बाहर करने के संबंध में सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की ओर से इस विषय पर बार-बार ध्यान दिलाए जाने के बावजूद केंद्र सरकार ने क्रीमीलेयर को बाहर करने की व्यवस्था न होने की बात कही है। यह समझ से परे है कि सरकार इस दिशा में नियमों में बदलाव क्यों नहीं करती।

शांता कुमार ने स्पष्ट किया कि वह आरक्षण की सुविधा किसी दूसरे वर्ग को देने की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि चाहते हैं कि आरक्षण का लाभ संबंधित आरक्षित जातियों के उन जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे, जिन्हें अब तक इसका लाभ नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी परिवार को आरक्षण का लाभ मिलने के बाद उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो जाती है, तो अगली बार उसी परिवार के बजाय उस जाति के अन्य गरीब परिवारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आरक्षण का वास्तविक उद्देश्य समाज के वंचित और गरीब लोगों को आगे बढ़ने का अवसर देना है। यदि आरक्षण का लाभ सबसे पहले जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई होती, तो अब तक आरक्षित जातियों में गरीबी दूर करने की दिशा में अधिक प्रभावी परिणाम सामने आ सकते थे।

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