आजादी के लिए नेहरू ही नहीं मसुरियादीन पासी भी जेल गए थे : योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का किया अनावरण, बोले-सम्मान किसी परिवार की बपौती नहीं

प्रयागराज, 15 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राहुल गांधी नोट कर लें, देश की आजादी के लिए केवल पंडित जवाहरलाल नेहरू ही जेल नहीं गए थे, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महाशय मसुरियादीन पासी ने भी जेल गए थे और आजादी की लड़ाई लड़ी थी।

मुख्यमंत्री योगी गुरुवार को यहां तेलियरगंज चौराहे पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संविधान सभा के सदस्य और पूर्व सांसद महाशय मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण कार्यक्रम के उपरांत जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उनकी आयु 66-67 वर्ष रही, जिसमें नौ वर्ष (1932 से 1944 के बीच) उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जेल में बिताए। वे रिहा होने के बाद भी जनजागरण में जुटे रहे। उन्होंने कहा कि महापुरुषों का सम्मान किसी परिवार की बपौती नहीं है। जिन्होंने देश और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित किया, उन्हें सम्मान मिलना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रतिमा स्थल के चौराहे का नाम महाशय मसुरियादीन पासी के नाम पर रखा जाएगा। इसके लिए उन्होंने महापौर से प्रस्ताव तैयार करने को कहा। साथ ही प्रयागराज की किसी अच्छी संस्था का नाम भी उनके नाम पर रखने और वहां उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित करने की बात कही।

उन्होंने कहा कि महापुरुषों को सम्मान देना समाज के उज्ज्वल भविष्य की नींव है। अतीत को सम्मान देकर वर्तमान को संवारा जा सकता है और वर्तमान बेहतर होगा तो भविष्य भी उज्ज्वल बनेगा। महाशय मसुरियादीन पासी का सम्मान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान है। इसमें किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि दो अक्टूबर 1911 को जन्मे महाशय मसुरियादीन पासी को इतिहास के कालचक्र ने भुला दिया था, लेकिन विकास और विरासत में विश्वास करने वाली भाजपा सरकार महापुरुषों को विस्मृत नहीं करती। उनकी स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिमा का अनावरण किया गया है।

पंडित नेहरू के साथ संसद पहुंचे थे मसुरियादीन पासी

मुख्यमंत्री ने बताया कि महाशय मसुरियादीन पासी वर्ष 1946 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने। स्वतंत्र भारत में वह 1952 से 1972 तक चार बार लोकसभा के लिए चुने गए। वर्ष 1952 में जब एक संसदीय क्षेत्र से दो सांसद चुने जाते थे, तब पंडित जवाहरलाल नेहरू और मसुरियादीन पासी एक साथ संसद पहुंचे थे।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद 1871 में जरायम पेशा कानून बनाया था। इस कानून के माध्यम से पासी सहित अनेक जातियों को अपमानित किया गया। बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और महाशय मसुरियादीन पासी ने इस कानून के खिलाफ आवाज उठाई। अंततः इस कानून को समाप्त कराने की लड़ाई ने पासी, सोनकर, वंचित और दलित समाज को सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री ने पासी समाज के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराजा बिजली पासी ने 12वीं सदी में लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में 12 किले बनवाए थे। इनका उद्देश्य विदेशी आक्रांताओं से मुकाबला करने की रणनीति को मजबूत करना था। उन्होंने वीर मक्का पासी और उनकी पत्नी वीरांगना ऊदा देवी के बलिदान को भी याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी की लड़ाई में वीर मक्का पासी के वीरगति प्राप्त करने के बाद ऊदा देवी ने मोर्चा संभाला और अंग्रेजों का डटकर मुकाबला किया। अंततः उन्होंने भी देश के लिए अपना बलिदान दे दिया।

ऊदा देवी के नाम पर बनेगी पीएसी बटालियन

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने लखनऊ में महाराजा बिजली पासी के किले का पुनरुद्धार कराया है। वहीं, वीरांगना ऊदा देवी के नाम पर पीएसी बटालियन गठित की जा रही है। वहां उनकी अश्वारोही प्रतिमा भी स्थापित की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन महापुरुषों ने दलितों और वंचितों की आवाज बुलंद की तथा देश और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित किया, उन्हें उचित सम्मान मिलना चाहिए। महापुरुषों का सम्मान किसी परिवार की बपौती नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का अधिकार है।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नंदगोपाल गुप्ता नंदी, महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी, फूलपुर सांसद प्रवीण पटेल, विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी, पीयूष रंजन निषाद, वाचस्पति पासी, दीपक पटेल, गुरु प्रसाद मौर्य, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल और सुरेंद्र चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस अवसर पर महाशय मसुरियादीन पासी की पुत्री कमला कुमारी और पौत्र सचिन कुमार भी मौजूद रहे।

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