नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा अब केवल सैन्य क्षमताओं तक सीमित नहीं है बल्कि इसके लिए वैज्ञानिक संस्थानों और सशस्त्र बलों के बीच घनिष्ठ सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते सुरक्षा और प्रौद्योगिकी परिदृश्य में नई चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर तैयारी, रणनीतिक दूरदृष्टि और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता जरूरी है।
राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (एनडीसी) के 66वें पाठ्यक्रम के संकाय सदस्यों और प्रतिभागियों से मुलाकात के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध के तौर-तरीके अब पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं बल्कि साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी तक फैल गए हैं। ऐसे में तेजी से निर्णय लेने की व्यवस्था का महत्व भी बढ़ गया है।
मुर्मु ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक संस्थानों और सशस्त्र बलों के बीच निकट समन्वय जरूरी है ताकि नवाचार को व्यावहारिक समाधानों में बदला जा सके। हाल के संघर्षों ने ऐसी किफायती प्रौद्योगिकियों के महत्व को रेखांकित किया है, जो उन्नत रक्षा प्रणालियों की पूरक बन सकें और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करें।
उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और नवाचार के बीच संबंध मजबूत करने के लिए अनुसंधान, विकास एवं नवाचार योजना जैसी सरकारी पहलों के महत्व को भी रेखांकित किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि विज्ञान, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों के विभिन्न क्षेत्रों में कृत्रिम मेधा (एआई) का इस्तेमाल बढ़ रहा है। हालांकि, निर्णय लेने की पूरी जिम्मेदारी इस प्रौद्योगिकी को नहीं सौंपी जा सकती। उन्होंने एआई के उपयोग में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।
मुर्मु ने कहा कि आर्थिक मजबूती राष्ट्रीय सुरक्षा के ढांचे का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने बाहरी कारकों से उत्पन्न व्यवधानों का सामना करने की क्षमता प्रदर्शित की है। भारत ने ऐसा अपनी रणनीतिक निर्णय लेने की स्वतंत्रता से समझौता किए बिना किया है।
