हरिद्वार, 12 अक्टूबर (हि.स.)। त्रिपुरा में महिलाओं के नेतृत्व वाले हथकरघा उद्यमों को सशक्त बनाने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की और त्रिपुरा ग्रामीण आजीविका मिशन (टीआरएलएम) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
इस अवसर पर त्रिपुरा सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव अभिषेक सिंह और आईआईटी रुड़की के डिजाइन विभाग के प्रमुख प्रो. ए.के. शर्मा मौजूद रहे। एमओयू पर टीआरएलएम के सीईओ तरित कांति चकमा और आईआईटी रुड़की के प्रो. बिभूति रंजन भट्टाचार्य ने हस्ताक्षर किए।
तीन वर्ष की इस साझेदारी के तहत उत्तर त्रिपुरा, उनाकोटी और धलाई जिलों की 500 महिला स्वयं सहायता समूह बुनकरों को सशक्त बनाया जाएगा। प्रौद्योगिकी, डिजाइन नवाचार, कौशल विकास, ब्रांडिंग, उद्यमिता और डिजिटल बाजार तक पहुंच को एकीकृत कर पारंपरिक हथकरघा क्षेत्र को टिकाऊ और बाजारोन्मुख आजीविका तंत्र में बदला जाएगा।
सचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि अनुसंधान को प्रयोगशाला से क्षेत्र तक ले जाना जरूरी है ताकि वास्तविक चुनौतियों का समाधान हो सके। प्रो. ए.के. शर्मा ने कहा कि आईआईटी रुड़की विकास पहलों से जुड़कर स्थाई प्रभाव पैदा करने के लिए प्रतिबद्ध है। टीआरएलएम सीईओ तरित कांति चकमा ने कहा कि ग्रामीण समुदायों तक ज्ञान और नवाचार पहुंचाने के लिए प्रतिष्ठित संस्थानों से सहयोग किया जा रहा है।
यह सहयोग आईआईटी की डिजाइन और तकनीकी विशेषज्ञता को टीआरएलएम के व्यापक नेटवर्क से जोड़ेगा। पारंपरिक शिल्प को समकालीन डिजाइन से जोड़कर उत्पादकता और बाजार पहुंच बढ़ाई जाएगी। कार्यक्रम में प्रो. सौरव अरोड़ा, प्रो. कल्पक कुलकर्णी और टीआरएलएम अधिकारी मौजूद रहे।
