नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (हि.स.)। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत गुजरात के वडोदरा में दिल्ली-मुंबई राजधानी रेलमार्ग के ऊपर सभी 14 पोर्टल बीम का निर्माण पूरा कर लिया गया है। इससे इस व्यस्त रेलमार्ग के ऊपर 40 मीटर लंबे कंपोजिट गर्डर स्थापित करने और बुलेट ट्रेन के एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के अनुसार, वडोदरा में यह उपलब्धि बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को मौजूदा रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इस खंड में बुलेट ट्रेन का मार्ग चालू रेल लाइनों और घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिससे निर्माण कार्य तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है।
वडोदरा में बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का संबंधित हिस्सा लगभग 8.3 किलोमीटर लंबा है। इस खंड में भारतीय रेलवे की पांच रेल लाइनें आती हैं, जिनमें दो मुख्य लाइनें शामिल हैं। बुलेट ट्रेन का मार्ग दिल्ली-मुंबई राजधानी मुख्य रेलमार्ग को तिरछे पार करता है, जिसके कारण विशेष संरचनाओं का निर्माण करना पड़ा है।
राजधानी रेलमार्ग के ऊपर बनाए गए 14 पोर्टल बीम में से 10 वडोदरा बुलेट ट्रेन स्टेशन और विश्वामित्री रेलवे स्टेशन के बीच सूरत की ओर स्थित हैं, जबकि चार वडोदरा रेलवे स्टेशन और छायापुरी रेलवे स्टेशन के बीच अहमदाबाद की ओर बनाए गए हैं।
ये पोर्टल बीम बुलेट ट्रेन के एलिवेटेड मार्ग के ऊपरी ढांचे को सहारा देंगे। राजधानी रेलमार्ग के ऊपर इन 14 बीम पर लगभग 40 मीटर लंबे कंपोजिट गर्डर स्थापित किए जाएंगे। अन्य पोर्टल बीम वाले स्थानों पर ढांचे को आगे बढ़ाने के लिए स्पैन-बाय-स्पैन (एसबीएस) तकनीक अपनाई जाएगी।
रेलवे लाइनों के ऊपर सीमित जगह और चालू रेल परिचालन को देखते हुए इन पोर्टल बीम का निर्माण मौके पर ही कंक्रीट डालकर किया गया है। प्रत्येक बीम का वजन निर्माण पूरा होने पर लगभग 1,500 टन होता है। इसकी ऊंचाई और चौड़ाई करीब चार-चार मीटर तथा लंबाई लगभग 37 मीटर है। प्रत्येक बीम के निर्माण में करीब 590 घन मीटर कंक्रीट और लगभग 55 टन इस्पात के सरिये का इस्तेमाल किया गया है।
इन भारी संरचनाओं के निर्माण में उच्च क्षमता वाली क्रेन, हाइड्रोलिक जैक, लंबी पहुंच वाले कंक्रीट पंप और सटीक सर्वेक्षण उपकरणों का उपयोग किया गया। रेलवे लाइनों के ऊपर काम होने के कारण निर्माण के विभिन्न चरणों की सावधानीपूर्वक योजना बनाने, भारतीय रेलवे के साथ समन्वय रखने और आवश्यकता के अनुसार निर्धारित समय के लिए रेल परिचालन रोकने की व्यवस्था भी करनी पड़ी।
