नई दिल्ली, 25 सितंबर (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को तेजी से बदलती वैश्विक सुरक्षा और विकास संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच निरंतर संवाद, आपसी सीख और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में देश अलग-अलग रहकर उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना नहीं कर सकते।
उपराष्ट्रपति ने यहां इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट प्रोग्राम (इन-स्टेप) के चौथे संस्करण के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान रणनीतिक वातावरण तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक सुरक्षा चिंताओं के साथ प्रौद्योगिकी, साइबरस्पेस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक मजबूती, समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति शृंखला जैसे विषय भी आपस में जुड़ गए हैं।
उन्होंने कहा कि इन-स्टेप वैश्विक घटनाक्रमों के दीर्घकालिक प्रभावों को समझने, व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण विकसित करने और उचित प्रतिक्रियाएं तैयार करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कार्यक्रम की मूल भावना को तीन शब्दों में रेखांकित करते हुए कहा, “वैश्विक स्तर पर सोचें, रणनीतिक रूप से जुड़ें और सामंजस्य के साथ काम करें।”
राधाकृष्णन ने अंतरराष्ट्रीय विमर्श को आकार देने में वैश्विक दक्षिण की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि इन देशों के विविध अनुभव और विकास संबंधी प्राथमिकताएं लचीलापन, विकास, सुरक्षा, सुशासन और सहयोग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सीख देती हैं। भारत का वैश्विक दक्षिण के साथ जुड़ाव आपसी सम्मान, साझा हितों, संप्रभु समानता और प्रत्येक देश की विकास एवं रणनीतिक प्राथमिकताओं के प्रति सम्मान पर आधारित है।
उपराष्ट्रपति ने भ्रष्टाचार को वैश्विक दक्षिण के देशों के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों में से एक बताते हुए इसे समाप्त करने के लिए समन्वित प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने प्रतिभागियों से हर स्तर पर भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था बनाने की दिशा में काम करने और सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी तथा पारदर्शिता को मजबूत करने का आग्रह किया।
उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल के माध्यम से वैश्विक दक्षिण के देशों को भारत की सहायता का उल्लेख करते हुए कहा कि वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति का लाभ पूरी मानवता को मिलना चाहिए। ज्ञान और नवाचार को मानवता के सामूहिक हित के लिए साझा किया जाना चाहिए। यह भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’- एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य की भावना के अनुरूप है।
कार्यक्रम के चौथे संस्करण में 22 देशों के 25 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों सहित कुल 38 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इनमें श्रीलंका, सेशेल्स, मंगोलिया, नेपाल, मॉरीशस, मालदीव, ओमान, गुयाना, चिली, अर्जेंटीना, फिलीपींस, थाईलैंड, आर्मेनिया, किर्गिस्तान, कतर, म्यांमार, उज्बेकिस्तान और ब्राजील सहित अन्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
दो सप्ताह का इन-स्टेप विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय द्वारा राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वरिष्ठ पेशेवरों को रणनीतिक, सुरक्षा और विकास संबंधी मुद्दों पर विचारों के आदान-प्रदान तथा संस्थागत और पेशेवर संबंधों को मजबूत करने का मंच प्रदान करना है। इसके पिछले संस्करण मार्च 2024 अक्टूबर 2024 और अक्टूबर-नवंबर 2025 में आयोजित हुए थे।
