नई दिल्ली, 22 सितंबर (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को जल संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि जल सुरक्षा से ही जन और राष्ट्र सुरक्षा सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि ने जल प्रबंधन की चुनौतियों को और जटिल बना दिया है। ऐसे में जल संसाधनों के संरक्षण, भंडारण, प्रबंधन और विवेकपूर्ण उपयोग के लिए समग्र दृष्टिकोण जरूरी है।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन मंगलवार को भारत मंडपम में आयोजित 9वें भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उद्घाटन समारोह में जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल, जलशक्ति राज्यमंत्री वी. सोमन्ना और राजभूषण चौधरी समेत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा देश-विदेश के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस वर्ष के आयोजन में 35 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी हो रही है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि जल ही जीवन और सभ्यताओं का आधार है। भारत की प्राचीन सभ्यताएं नदियों के आसपास विकसित हुईं और समुदायों ने जल संरक्षण, बंटवारे तथा प्रबंधन की समृद्ध परंपराएं विकसित कीं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ते समय इस पारंपरिक ज्ञान से सीख लेने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया की करीब 2.4 प्रतिशत भूमि है, जबकि यहां विश्व की लगभग 18 प्रतिशत आबादी रहती है और देश के पास दुनिया के मीठे जल संसाधनों का करीब चार प्रतिशत ही है। जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा का स्वरूप अनिश्चित हो रहा है। इसलिए अत्यधिक वर्षा और लंबे सूखे, दोनों स्थितियों से निपटने में सक्षम प्रणालियां विकसित करनी होंगी।
उपराष्ट्रपति ने नदी बेसिन प्रबंधन, भूजल पुनर्भरण, वर्षा जल संचयन और सिंचाई में दक्षता को एकीकृत दृष्टिकोण के तहत आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह की थीम “जलवायु अनुकूल जल प्रबंधन” मौजूदा परिस्थितियों में अत्यंत प्रासंगिक है।
उन्होंने राज्यों के बीच जल बंटवारे के विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ओर कुछ हिस्से सूखे जैसी परिस्थितियों का सामना करते हैं, वहीं दूसरी ओर देश के अन्य हिस्सों में बाढ़ आती है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में जल बंटवारे को लेकर 10 अंतरराज्यीय समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए हैं। उन्होंने केन-बेतवा और किशाऊ परियोजनाओं को अंतरराज्यीय सहयोग के उदाहरण के रूप में रेखांकित किया।
उपराष्ट्रपति ने जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने साल 2024 में ‘जल संचय जन भागीदारी’ का आह्वान किया था। उन्होंने बताया कि मई 2026 तक देश में 1.5 करोड़ से अधिक भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है।
उन्होंने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, जल जीवन मिशन और राष्ट्रीय जल मिशन जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि जल सुरक्षा के लिए व्यापक और समग्र दृष्टिकोण आवश्यक है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि जल संबंधी चुनौतियों का समाधान कोई एक संस्था, क्षेत्र या राज्य अकेले नहीं कर सकता। इसके लिए तकनीकी नवाचार, प्रभावी नीतियों, वैज्ञानिक ज्ञान, स्थानीय अनुभव और समुदाय की भागीदारी को एक साथ लाना होगा।
उल्लेखनीय है कि भारत के अंतरराष्ट्रीय जल आयोजन की परिकल्पना वर्ष 2012 में ‘इंडिया वाटर वीक’ के नाम से एक प्रमुख आयोजन के रूप में की गई थी। इसका उद्देश्य वैश्विक जल चुनौतियों का समाधान करना, सतत विकास को बढ़ावा देना तथा जल क्षेत्र में नवीन समाधानों को प्रदर्शित करना था।
समय के साथ यह आयोजन दुनिया भर के नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के प्रमुखों और समुदायों को एक मंच पर लाने वाला प्रमुख वैश्विक मंच बन गया है।
वर्ष 2012 से अब तक इंडिया वाटर वीक के आठ संस्करण आयोजित किए जा चुके हैं। ये वर्ष 2012, 2013, 2015, 2016, 2017, 2019, 2022 और 2024 हैं।
अब इसका आयोजन ‘भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह’ के नाम से किया जा रहा है।
