हमीरपुर, 22 अगस्त (हि.स.)। पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने भारतीय जनता पार्टी द्वारा वंदे मातरम् के सम्मान, गरिमा और ऐतिहासिक विरासत की रक्षा को लेकर पारित प्रस्ताव का स्वागत किया है। उन्होंने 19 अगस्त को कांग्रेस वर्किंग कमेटी द्वारा 1937 के उस प्रस्ताव को दोबारा पुष्ट किए जाने की कड़ी निंदा की, जिसके तहत राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन को केवल प्रथम दो अंतरों तक सीमित रखने की बात कही गई थी।
अनुराग सिंह ठाकुर ने शनिवार को एक बयान में कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति समर्पण की अमर अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता संग्राम का मंत्र और भारत की राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। वंदे मातरम् की विरासत को वोट बैंक की राजनीति और राजनीतिक तुष्टीकरण की गणित का विषय नहीं बनाया जा सकता। कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि स्वतंत्रता संग्राम और उसके प्रतीक किसी राजनीतिक दल की विरासत नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की साझा धरोहर हैं।
उन्होंने कहा कि 1937 की राजनीतिक परिस्थितियों को स्वतंत्र भारत की संवैधानिक एवं विधायी व्यवस्था से ऊपर नहीं रखा जा सकता। संविधान सभा ने 1950 में वंदे मातरम् के विशेष स्थान और ऐतिहासिक महत्व को स्वीकार किया था। वहीं, वर्ष 2026 में संसद द्वारा बनाए गए कानून ने राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान के साथ वैधानिक संरक्षण प्रदान किया है।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि किसी राजनीतिक दल की वर्किंग कमेटी का प्रस्ताव देश की संवैधानिक संस्थाओं और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता। स्वतंत्रता से पहले हुए किसी राजनीतिक समझौते के आधार पर वंदे मातरम् की ऐतिहासिक विरासत को सीमित करने का प्रयास न केवल इतिहास की दृष्टि से अनुचित है, बल्कि दुर्भाग्यपूर्ण भी है।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि भाजपा वंदे मातरम् के इतिहास, अर्थ और राष्ट्रीय महत्व को देश के हर कोने तक ले जाएगी। विशेष रूप से युवा पीढ़ी को यह बताया जाएगा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् ने किस प्रकार करोड़ों भारतीयों में राष्ट्रभक्ति और बलिदान की भावना को जागृत किया।
उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को यह समझाना आवश्यक है कि इन शब्दों में ऐसी शक्ति क्यों थी, जिससे एक साम्राज्य तक भयभीत हो गया था। इस इतिहास का संरक्षण केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना है।
