पटना, 17 अगस्त (आईएएनएस): सावन महीने के तीसरे सोमवार को बिहार के लखीसराय जिले के प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में पूजा करने पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच भीषण भगदड़ मचने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और 13 से अधिक लोग घायल हो गए। सोमवार तड़के अशोकधाम रेलवे स्टेशन से मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जमा थी। इसी दौरान अचानक बिजली का खंभा गिरने और उसमें करंट होने की अफवाह फैलने से अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई।
लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार ने बताया कि सुबह करीब 6:30 से 7 बजे के बीच भीड़ अचानक काफी बढ़ गई थी। अशोकधाम हॉल्ट के पास श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी हुई थी। इसी दौरान दो ट्रेनें भी वहां आकर रुकीं, जिससे भीड़ और घनी हो गई। अचानक एक बिजली का खंभा गिरने के बाद उसमें करंट होने की अफवाह फैल गई। घबराए श्रद्धालुओं ने भागने की कोशिश की, जिससे भगदड़ मच गई और कई लोग जमीन पर गिर गए। भीड़ के दबाव में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के बाद स्थानीय लोग और अन्य श्रद्धालु राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। घायलों को लखीसराय सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
अब तक मृतकों में मनमाला देवी (44), रिंकू देवी (50), हेमलता देवी (55) और ललिता देवी की पहचान हुई है। मनमाला देवी लखीसराय के बरहिया के इंद टोला की रहने वाली थीं और निरंजन कुमार की पत्नी थीं। रिंकू देवी मुंगेर के फरदा, सफियासराय इलाके की रहने वाली थीं और नीरज यादव की पत्नी थीं। हेमलता देवी लखीसराय के हलसी इलाके के कैंदी प्रतापपुर की रहने वाली थीं और सुरेंद्र यादव की पत्नी थीं। ललिता देवी भी हलसी के प्रतापपुर की रहने वाली थीं और गोरेलाल यादव की पत्नी थीं। बाकी तीन मृतकों की पहचान अभी नहीं हो सकी है।
यह हादसा सावन महीने के तीसरे सोमवार को हुआ। इस अवसर पर अशोकधाम मंदिर में जलाभिषेक और पूजा के लिए सुबह से ही हजारों श्रद्धालु जुटे थे। अशोकधाम मंदिर को श्री इंद्रदामनेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। विशाल शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध यह मंदिर बिहार के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। खासकर सावन के सोमवार को यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार के अनुसार, सुबह करीब 6:30 से पौने सात बजे के बीच दो ट्रेनों के पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ गई। भारी भीड़ के दबाव में मंदिर के बाहर लगी बैरिकेडिंग भी गिर गई। इसी दौरान बिजली का खंभा गिरने और करंट लगने की अफवाह से श्रद्धालुओं में दहशत और बढ़ गई, जिसके बाद भगदड़ मच गई।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर उन्होंने इसे बेहद दुखद और हृदयविदारक घटना बताया। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों को तत्काल और उचित उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन को निर्देश देने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हादसे में श्रद्धालुओं की मौत की खबर से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने मृतकों की आत्मा की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
अशोकधाम मंदिर भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को बिहार सरकार ने 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। प्रशासन की ओर से घायलों के इलाज के लिए भी आवश्यक व्यवस्था की जा रही है।
बिहार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने घटना को बेहद दुखद और हृदयविदारक बताया। उन्होंने कहा कि हादसा मंदिर परिसर में नहीं, बल्कि मंदिर के बाहर सड़क पर हुआ। बिजली का खंभा और तार गिरने के बाद वहां करंट होने की अफवाह फैल गई, जिससे लोगों में दहशत पैदा हुई।
सिन्हा ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से बात की है और घायलों के इलाज को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि घटना की पूरी जांच की जाएगी और जांच में जिन लोगों की लापरवाही या गैर-जिम्मेदारी सामने आएगी, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दुर्घटना के बाद वह पटना से लखीसराय के लिए रवाना हुए और मृतकों के परिजनों से मिलने की बात कही।
उन्होंने बताया कि सुबह करीब 5:30 बजे उन्होंने मंदिर में मौजूद लोगों से बात की थी और उस समय स्थिति सामान्य थी। करीब एक घंटे बाद, सुबह 6:30 बजे के आसपास स्थिति अचानक बदल गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अशोकधाम मंदिर में भगदड़ की घटना पर दुख जताया। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से ‘एक्स’ पर कहा गया कि लखीसराय में भगदड़ के कारण हुई मौतों की खबर बेहद पीड़ादायक है। प्रधानमंत्री ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। PMO ने कहा कि स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की सहायता कर रहा है।
घटना पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी दुख जताया। मुंगेर के सांसद और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि सावन के तीसरे सोमवार को अशोकधाम मंदिर में अचानक भीड़ बढ़ गई थी। इसी दौरान बिजली का तार गिरने, बिजली का खंभा टूटने और करंट प्रवाहित होने की अफवाह फैल गई। उनके अनुसार, इसी वजह से श्रद्धालुओं में दहशत पैदा हुई और भगदड़ मची।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी घटना को हृदयविदारक और बेहद दुखद बताया। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
बिहार के मंत्री निशांत कुमार ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि घटना से उनका हृदय बेहद व्यथित है। उन्होंने मृतकों की आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवारों को इस कठिन समय में शक्ति मिलने की प्रार्थना की।
वहीं, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रशासनिक कुप्रबंधन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में पर्याप्त सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था नहीं होने का मामला सामने आया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को मुआवजा और घायलों के लिए तत्काल बेहतर चिकित्सा व्यवस्था की मांग की।
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने घटना को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। घायलों का उचित इलाज सुनिश्चित करने के साथ-साथ जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की ओर से बताया गया कि घटनास्थल पर राहत एवं बचाव तथा भीड़ नियंत्रण का काम जारी है। घायलों के इलाज के साथ-साथ स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी, दो ट्रेनों के आगमन और अचानक बिजली का खंभा गिरने के बाद पैदा हुई दहशत सहित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
बताया जाता है कि अशोकधाम मंदिर का ऐतिहासिक संबंध पाल काल के विशाल शिवलिंग से है। सावन के महीने में खासकर सोमवार को यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। सोमवार को भी जलाभिषेक के लिए सुबह से ही हजारों लोग मंदिर की ओर जा रहे थे। इसी भारी भीड़ के बीच यह दर्दनाक हादसा हो गया।
