राज्यसभा में NCDC संशोधन विधेयक पारित, विपक्ष का वॉकआउट

नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस): एक घंटे से अधिक समय तक चली चर्चा के बाद बुधवार को ध्वनिमत से राज्यसभा में ‘नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित हो गया। केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने चर्चा का जवाब दिया। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी करते हुए वॉकआउट किया और इसके बाद की चर्चा में हिस्सा नहीं लिया।

विधेयक को चर्चा के लिए लेने से पहले उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने बताया कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पहले नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन विधेयक पर विचार करने का आग्रह किया था। इससे पहले सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद दोबारा शुरू होने पर भाजपा सांसद सुष्मिता देव ने माकपा सांसद जॉन ब्रिटास को लेकर अपनी कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर स्पष्टीकरण दिया।

सुबह के सत्र में सूचीबद्ध दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के बाद ब्रिटास ने आरोप लगाया था कि सुष्मिता देव ने उन्हें ‘लुंगीवाला’ कहकर टिप्पणी की। इसके जवाब में सुष्मिता देव ने कहा कि अगर ब्रिटास को लगता है कि उन्हें उनसे मिलकर कुछ कहना चाहिए, तो वह ऐसा करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वह केरल, पूर्वोत्तर और कर्नाटक के लोगों से प्यार करती हैं।

राज्यसभा में सदन के नेता जे. पी. नड्डा ने सुझाव दिया कि संबंधित सदस्य उनके कक्ष में बैठकर इस ‘गलतफहमी’ को दूर कर सकते हैं।

इस बीच, विपक्षी सांसद राम मंदिर के चंदे में चोरी के आरोपों को लेकर भी नारेबाजी करते रहे और राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी की मांग करते रहे।

इसके बाद उपसभापति ने केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल से लोकसभा में पारित 1962 के नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन अधिनियम में संशोधन के लिए लाए गए विधेयक को विचारार्थ पेश करने को कहा।

जब ममता ठाकुर को बोलने का मौका दिया गया, तो उन्होंने गृह मंत्री के सदन में मौजूद नहीं होने का सवाल उठाया। उपसभापति ने उन्हें इस मुद्दे पर आगे बोलने की अनुमति नहीं दी और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को बोलने के लिए आमंत्रित किया।

खड़गे ने भी यही मुद्दा उठाते हुए कहा कि चूंकि विधेयक गृह मंत्री के नाम से है, इसलिए उनका सदन में मौजूद रहना चाहिए। उपसभापति ने उन्हें आगे बोलने की अनुमति नहीं दी और सदन के नेता जे. पी. नड्डा से जवाब देने को कहा।

नड्डा ने कहा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने विपक्ष से चर्चा से भागने के बजाय सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की। इसके बाद विधेयक पर चर्चा आगे बढ़ी।

बहस में भाजपा के रामराव सखाराम वाडकुते, डीएमके के के. आर. एन. राजेश कुमार और भाजपा की सुलता देव समेत कई सांसदों ने हिस्सा लिया। सुलता देव ने आशंका जताई कि विधेयक के जरिए स्थानीय ग्रामीण सहकारी समितियों की शक्तियां कम कर उन्हें केंद्र सरकार के हाथों में देने का रास्ता खुल सकता है।

उन्होंने कहा कि इससे बिचौलियों के लिए अधिक अवसर पैदा हो सकते हैं और किसान साहूकारों के कर्ज के जाल से निकलकर कॉरपोरेट कंपनियों के नियंत्रण में जा सकते हैं। इससे किसानों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।

वहीं, एआईएडीएमके के एम. थंबीदुरई ने विधेयक का समर्थन किया। जेडीयू सांसद संजय कुमार झा ने भी विधेयक के समर्थन में बोलते हुए सहकारी क्षेत्र के माध्यम से बिहार में जेडीयू सरकार की विभिन्न उपलब्धियों का उल्लेख किया।

विधेयक के समर्थन में एनसीपी के राजेंद्र हीरालाल जैन, टीडीपी की विजया चिंताकायला, बीआरएस के रवि चंद्र वड्डिराजु, भाजपा के अमर पाल मौर्य और डॉ. एम. धनपाल समेत कई अन्य सांसदों ने भी विचार रखे।

चर्चा के बाद विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इसके बाद उपसभापति ने ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ को चर्चा के लिए लिया।

–आईएएनएस

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