साहस है तो झारखंड के मुख्यमंत्री आवास के बाहर छात्रों के समर्थन में धरने पर बैठें राहुल: केंद्रीय मंत्री

रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस): रांची में जारी छात्र आंदोलन को लेकर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने रविवार को झारखंड सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आंदोलनरत छात्रों का समर्थन नहीं करने को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा।

संजय सेठ रविवार को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात कर उनके आंदोलन के प्रति समर्थन जताया। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद छात्रों ने 2 जुलाई से आंदोलन शुरू किया था।

रविवार को आंदोलन 16वें दिन में प्रवेश कर गया। हालांकि, छात्रों के पीछे हटने के कोई संकेत नहीं हैं। शनिवार को छात्र प्रतिनिधियों और राज्य सरकार के बीच हुई दूसरे दौर की वार्ता भी किसी समाधान या सहमति के बिना समाप्त हो गई।

इस बीच, राहुल गांधी ने कहा है कि प्रत्येक सरकार को शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए। इसी बयान को लेकर संजय सेठ ने उन्हें रांची आकर आंदोलनरत छात्रों से मिलने की चुनौती दी।

प्रदर्शन स्थल पर आईएएनएस से बातचीत में सेठ ने कहा, “राहुल गांधी, झारखंड की जनता आपको बुला रही है, लेकिन राहुल गांधी गायब हैं। राहुल गांधी पाखंडी हैं। वह हर चीज को राजनीतिक नजरिए से देखते हैं। यहां कोई राजनीतिक लाभ नहीं है, क्योंकि आप सरकार में हैं। जहां चुनाव होते हैं, आप वहीं दौड़ते हैं।”

कांग्रेस नेता को और कड़ी चुनौती देते हुए सेठ ने कहा, “राहुल गांधी, अगर आपके अंदर थोड़ी भी नैतिकता बची है, अगर कोई नैतिकता है, तो मैं आपको चुनौती देता हूं—साहस है तो रांची आइए। साहस है तो मुख्यमंत्री के आवास के बाहर बैठिए।”

केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के साथ रांची के छात्र आंदोलन की तुलना करने को लेकर भी राहुल गांधी पर “दोहरा मापदंड” अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा आंदोलनरत छात्रों के साथ खड़ी रहेगी और उनकी मांगों का समर्थन करती रहेगी।

सेठ ने झारखंड सरकार और इंडिया गठबंधन पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन को कमजोर और विभाजित करने के उद्देश्य से एनएसयूआई और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) युवा मोर्चा के सदस्यों को प्रदर्शन में लाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “पहले ही दिन 24 घंटे के भीतर मुख्यमंत्री को छात्रों से मिलना चाहिए था। ये हमारे बच्चे हैं, हमारी बेटियां हैं। लेकिन सरकार 16 दिनों तक चुप रही। अब जिस तरह अंग्रेजों ने ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाई थी, उसी तरह राज्य सरकार भी फूट डालो और राज करो की नीति अपना रही है। अलग-अलग संगठनों से अलग-अलग तरीके से संपर्क कर एक नाटक किया जा रहा है।”

झारखंड भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू ने भी छात्रों की मांगों का समाधान करने के बजाय मुद्दे का “राजनीतिकरण” करने का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार की आलोचना की।

पत्रकारों से बातचीत में साहू ने कहा, “झारखंड के हमारे बच्चे, हमारे छात्र जिस तरह अपनी आंखों से आंसू बहा रहे हैं, मुझे लगता है कि सरकार में इन बच्चों के आंसू समझने का साहस नहीं है। ये सिर्फ तीन बच्चों के आंसू नहीं हैं, बल्कि इस राज्य के सैकड़ों छात्रों के आंसू हैं।”

उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की पीड़ा समझनी चाहिए, लेकिन वह समस्या का समाधान करने के बजाय इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने में लगी है। साहू ने आरोप लगाया कि एनएसयूआई और जेएमएम युवा मोर्चा के सदस्यों को आंदोलन में उतारकर छात्रों को बांटने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने सवाल किया, “वे इतने दिनों तक कहां थे? छात्र और झारखंड की जनता सब समझ चुकी है। सीबीआई जांच से उन्हें परेशानी क्यों है?”

झारखंड भाजपा अध्यक्ष ने राहुल गांधी पर भी एक बार फिर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता दिल्ली में छात्रों से जुड़े मुद्दों पर मुखर रहे हैं, लेकिन रांची में आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रति वैसी ही चिंता नहीं दिखा रहे हैं।

साहू ने कहा, “दिल्ली में कांग्रेस शोर मचा रही थी। राहुल गांधी फोन पर छात्रों को समझाने की कोशिश करते हैं। लेकिन राहुल गांधी को पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस बारे में सवाल करना चाहिए। राहुल गांधी में साहस है तो जिस तरह वह प्रधानमंत्री आवास के बाहर बैठे थे, उसी तरह मुख्यमंत्री आवास के बाहर भी बैठें।”

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