पीओके में अशांति से लश्कर, जैश और हिजबुल का नेतृत्व दबाव में; कश्मीर पर पाकिस्तान का नैरेटिव कमजोर पड़ रहा: सरकारी सूत्र

नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस): पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पिछले दो महीनों से जारी विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों के साथ टकराव के कारण लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों का नेतृत्व दबाव में है। भारतीय सरकारी सूत्रों का दावा है कि पीओके में जारी अशांति के चलते जम्मू-कश्मीर को लेकर इन संगठनों का एजेंडा और प्रचार कमजोर पड़ता जा रहा है।

एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, पाकिस्तान के समर्थन से बने इन आतंकी संगठनों का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद फैलाना और अलगाववादी नेटवर्क के जरिए भारत विरोधी माहौल तैयार करना था। लेकिन पीओके में लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने उनके व्यापक एजेंडे को नुकसान पहुंचाया है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के सात वर्ष पूरे होने के मौके पर जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की स्थिति में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, जम्मू-कश्मीर में हिंसा में कमी आई है, पर्यटन को बढ़ावा मिला है और लोगों के जीवन में सुधार हुआ है, जबकि पीओके लगातार अशांति, हिंसा और अस्थिरता का सामना कर रहा है।

एक खुफिया अधिकारी का कहना है कि ऐसी स्थिति में जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग कर पाकिस्तान के साथ जोड़ने का नैरेटिव अब कमजोर पड़ रहा है। उनका दावा है कि जम्मू-कश्मीर के लोग अब पीओके की मौजूदा स्थिति को एक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की व्यवस्था ने पीओके में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हिंसा का आरोप मढ़ने और हालात को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश की है। हालांकि, हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन ने सार्वजनिक रूप से संयम बरतने की अपील करते हुए प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तान सरकार, दोनों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने का आग्रह किया है।

अपने बयान में सलाहुद्दीन ने कहा कि लोगों की मौत, संपत्ति का नुकसान और जबरन लोगों के लापता किए जाने की घटनाएं कश्मीरियों के मनोबल को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि हिंसा के कारण सीमाएं दुश्मनों की घुसपैठ के लिए संवेदनशील होती जा रही हैं।

हालांकि, एक भारतीय अधिकारी ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि भारत कभी पाकिस्तान में आतंकवादियों की घुसपैठ नहीं कराता, जबकि पाकिस्तान लंबे समय से भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराने की कोशिश करता रहा है। अधिकारी के अनुसार, सलाहुद्दीन इस मुद्दे के जरिए जम्मू-कश्मीर के लोगों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।

सरकारी सूत्रों का यह भी कहना है कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के शीर्ष नेताओं ने भले ही सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया हो, लेकिन पीओके की मौजूदा स्थिति को लेकर उनके नेतृत्व और कैडर में बेचैनी बढ़ रही है।

उल्लेखनीय है कि पिछले दो महीनों से अधिक समय से पीओके में संयुक्त एक्शन आवामी कमेटी (जेएएसी) के नेतृत्व में प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारी बेहतर बुनियादी ढांचे और सस्ती जीवन-यापन की सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। भारतीय सरकारी सूत्रों का दावा है कि इन प्रदर्शनों को दबाने के दौरान पाकिस्तान के सुरक्षा बलों की कार्रवाई में करीब 40 लोगों की मौत हुई है और कई लोगों को जबरन लापता किया गया है। सूत्रों का कहना है कि जब तक पाकिस्तान की सरकार लोगों की वास्तविक शिकायतों का समाधान नहीं करती, तब तक इस आंदोलन के शांत होने की संभावना कम है।

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