गुजरात के प्रभास पाटन में सोमनाथ मंदिर की शाश्‍वत भावना का उत्‍सव मनाने के लिए चार दिवसीय सोमनाथ स्वाभिमान पर्व शुरू

नई दिल्ली, 8 जनवरी: चार दिवसीय सोमनाथ स्वाभिमान पर्व आज से शुरू हो रहा है। यह पर्व जनवरी 1026 ईस्वी में महमूद गजनी द्वारा मंदिर पर किए गए हमले की 1000वीं वर्षगांठ और सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में 1951 में पुनर्निर्मित मंदिर के उद्घाटन की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी 11 जनवरी को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होंगे। इस आयोजन में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियां होगी।

इस आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में 3000 ड्रोनों का विशाल ड्रोन शो, लगातार 72 घंटे चलने वाला ‘ओंकार नाद’ और भव्य ‘शौर्य यात्रा’ आदि शामिल हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की शुरुआत के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी है। श्री मोदी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि स्वाभिमान पर्व भारत माता के उन अनगिनत संतानों को याद करने का अवसर है, जिन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि जनवरी 1026 में सोमनाथ पर पहला हमला हुआ था। श्री मोदी ने कहा कि बार-बार आक्रमणों के बावजूद, भक्तों की अटूट आस्था और भारत के सभ्यतागत संकल्प ने यह सुनिश्चित किया कि सोमनाथ का बार-बार पुनर्निर्माण हो। प्रधानमंत्री ने एक हज़ार वर्ष से भी अधिक समय से लोगों के हृदय में सोमनाथ की स्‍मृतियों को जीवंत रखने वाली शाश्वत सभ्यतागत भावना का स्‍मरण किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ की अपनी पिछली यात्राओं की झलकियाँ साझा कीं। उन्‍होंने नागरिकों से #SomnathSwabhimanParv के साथ अपनी यादें साझा करते हुए उत्सव में शामिल होने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने 31 अक्टूबर 2001 के कार्यक्रम को याद किया, जो पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के खुलने के 50 वर्ष पूरे होने का प्रतीक था। वर्ष 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में यह मंदिर खोला गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल, के एम मुंशी और कई अन्य लोगों का महत्वपूर्ण योगदान था। श्री मोदी ने कहा कि 2026 में 1951 के भव्य समारोह के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं।

प्रधानमंत्री 11 जनवरी को ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम के अंतर्गत पूरे वर्ष आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।

इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण तीन हजार ड्रोन का विशाल  शो, लगातार 72 घंटे का ‘ओंकार नाद’ और भव्य ‘शौर्य यात्रा’ हैं।