अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान ने प्रजनन क्षमता से जुड़े विकार – डी.एस.डी. के बारे में जागरूकता फैलाने की अपील की

नई दिल्ली, 29 दिसंबर: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान-एम्‍स ने प्रजनन क्षमता से जुड़े विकार – डी.एस.डी. के बारे में जागरूकता फैलाने की अपील की है। डी.एस.डी. असामान्‍य स्थितियों का एक समूह है जिसमें जीन, हार्मोन और प्रजनन अंग शामिल होते हैं। ऐसी स्थिति में किसी बच्‍चे का लिंग विकास ज़्यादातर दूसरे बच्‍चों से अलग होता है। एम्स नई दिल्ली के निदेशक, डॉ. एम. श्रीनिवास ने कहा कि इस बीमारी से जूझ रहे कई बच्चों को अक्सर सामाजिक उपेक्षा का सामना करना पड़ता है और कुछ अभिभावक, जानकारी और जागरूकता की कमी के कारण इससे परेशान हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता को इससे घबराने की आवश्‍यकता नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि समय पर चिकित्सीय मार्गदर्शन और परामर्श से ऐसी स्थिति से निपटा जा सकता है। उन्होंने बताया कि एम्स में डॉक्टरों का दल इस बीमारी से निपटने के लिए काम कर रहा है।

इस बीच, आकाशवाणी समाचार से विशेष बातचीत में, एम्स नई दिल्ली के बाल रोग विभाग की प्रोफेसर, डॉ. वंदना जैन ने कहा कि ये कोई असामान्‍य बीमारी नहीं है, बल्कि सिर्फ़ एक आनुवंशिक विकार है।

डॉ. जैन ने आकाशवाणी पर प्रसारित मन की बात कार्यक्रम का उल्‍लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने भी एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग के कारण एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्‍टेंस को एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बताया है। उन्‍होंने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन केवल डॉक्टर के सलाह पर ही करना चाहिए।