आज विश्व जल दिवस है। यह दिन मीठे पानी के महत्व और जल संसाधनों के उचित प्रबंधन के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। कार्यक्रम का उद्देश्य दुनिया भर में जल संकट से निपटने के लिए जागरूकता बढ़ाना और कार्रवाई को प्रेरित करना है। यह उत्सव सतत विकास लक्ष्य-6 से निकटता से जुड़ा हुआ है। इसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक सभी के लिए पानी और स्वच्छता सुनिश्चित करना है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज विश्व जल दिवस पर जल संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए देश की प्रतिबद्धता दोहराई। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए एक वीडियो साझा किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जल, सभ्यताओं की जीवन रेखा रहा है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए इसे संरक्षित करने की महति आवश्यकता है।
इस वर्ष विश्व जल दिवस का विषय ‘ग्लेशियर संरक्षण’ है। यह वैश्विक मीठे पानी की आपूर्ति बनाए रखने में ग्लेशियर की महत्वपूर्ण भूमिका और जलवायु संरक्षण उपायों की तत्काल आवश्यकता पर बल देता है। संयुक्त राष्ट्र ने विश्व जल दिवस की घोषणा वर्ष 1992 में ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में पर्यावरण और विकास पर सम्मेलन में की थी। इस सम्मेलन में आधिकारिक रूप से 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। पहला विश्व जल दिवस 22 मार्च 1993 को मनाया गया था। जो वार्षिक वैश्विक पहल की शुरुआत थी। विश्व जल दिवस का प्राथमिक लक्ष्य हमारे ग्रह पर पानी के महत्व को पहचानना है। जश्न मनाने से परे, यह दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करने वाले गंभीर जल संकट को उजागर करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।
वर्तमान में, लगभग दो अरब 20 करोड़ लोग स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल से वंचित हैं। जल संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के दुनिया भर में आज कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इस अवसर पर, सरकार हरियाणा के पंचकूला में बहुप्रतीक्षित जल शक्ति अभियान: कैच द रेन – 2025 शुरु करेगी। यह अभियान जल शक्ति मंत्रालय, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा हरियाणा सरकार के सहयोग से शुरू कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य जल संरक्षण के लिए देश भर में जागरूकता बढ़ाना है। इससे “हर बूंद महत्व रखती है” का सपना साकार किया जा सकेगा। कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी हिस्सा लेंगे।