नई दिल्ली, 04 अप्रैल (हि.स.)। पाकिस्तान से सोमवार को प्रकाशित अधिकांश अखबारों ने इमरान खान सरकार के खिलाफ संसद में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को डिप्टी स्पीकर के जरिए खारिज किए जाने और इमरान खान के जरिए नेशनल असेंबली को भंग किए जाने के प्रस्ताव पर राष्ट्रपति की मुहर लगाए जाने की खबरें प्रमुखता से छापी हैं। अखबारों ने अविश्वास प्रस्ताव से सम्बंधित कानूनी दांव-पेंच से सम्बंधित खबरें भी महत्व के साथ प्रकाशित की हैं। अखबारों ने अविश्वास प्रस्ताव को खारिज किए जाने और असेंबली को भंग किए जाने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट के जरिए सुनवाई किए जाने और इस सिलसिले में पांच सदस्यीय बेंच गठित किए जाने की खबरें भी प्रमुखता से छापी हैं।
अखबारों ने पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार का एक बयान भी प्रकाशित किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान में होने वाली इस तरह की घटनाओं से सेना का कोई सरोकार नहीं है। अखबारों ने प्रधानमंत्री इमरान खान के उस बयान को छापा है जिसमें उन्होंने कहा है कि अपोजिशन को समझ नहीं आ रहा है कि क्या हुआ? सरप्राइज से सदमे में है। अखबारों ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के लीडर बिलावल भुट्टो के जरिए इमरान खान के अपनी हार को देखकर भागने की कोशिश करने के बयान को भी जगह दी है। साथ ही पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज के लीडर शाहबाज शरीफ का भी बयान छापा है जिसमें उन्होंने कहा है कि इमरान खान संविधान और लोकतंत्र के गद्दार हैं। हार साबित हो गई है।
अखबारों ने 15 दिनों तक इमरान खान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहने की खबरें देते हुए बताया है कि मंत्रिमंडल को भंग कर दिया गया है। अखबारों ने पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री शेख रशीद का बयान छापा है जिसमें उन्होंने कहा है कि इमरान खान 15 दिन और प्रधानमंत्री रहेंगे और सुप्रीम कोर्ट का फैसला सर आंखों पर होगा। अखबारों ने पंजाब विधानसभा में भी हंगामा होने, आपस में गुत्थमगुत्था और हाथापाई होने की खबरें दी हैं। अखबारों ने लिखा है कि सदन में मछली मंडी का दृश्य नजर आया।
अखबारों ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का भी एक बयान छपा है जिसमें उन्होंने कहा है कि एक जुनूनी व्यक्ति ने आज संविधान को पांव तले रौंद दिया है। अखबारों ने पीडीएम अध्यक्ष मौलाना फजलुर्रहमान का भी बयान छापा है जिसमें उन्होंने कहा है कि लोकतंत्र की बिसात लपेटने के लिए इमरान ने डिक्टेटर को भी पीछे छोड़ दिया है। अखबारों ने पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का एक बयान छापा है जिसमें उन्होंने कहा है कि लोकतंत्र के खिलाफ साजिश करने पर कौम खामोश नहीं रहेगी।
अखबारों ने पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री फव्वाद चौधरी का भी एक बयान छापा है जिसमें उन्होंने कहा है कि स्पीकर का फैसला चैलेंज नहीं किया जा सकता है। देश में मार्शल लॉ की कोई संभावना नहीं है। यह सभी खबरें रोजनामा दुनिया, रोजनामा खबरें, रोजनामा औसाफ, रोजनामा पाकिस्तान, रोजनामा एक्सप्रेस, रोजनामा नवाएवक्त और रोजनामा जंग ने अपने पहले पन्ने पर छापी हैं।
रोजनामा खबरें ने एक खास खबर राजस्थान से दी है जिसमें बताया गया है कि राजस्थान में हिंदू-मुस्लिम फसाद होने की खबर है। अखबार ने बताया कि मुसलमानों की संपत्तियों को तबाह किया गया है और प्रशासन ने स्थिति को काबू में करने के लिए कर्फ्यू लगा दिया है। अखबार ने बताया है कि हिंदू संगठनों की तरफ से करौली में मुस्लिम इलाकों से मोटरसाइकिल रैली निकाली गई। इस दौरान मस्जिद पर पथराव शुरू कर दिया गया। मुसलमानों की तरफ से बचाव करने पर उनकी संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया गया है। इस दौरान होने वाली झड़प में पुलिस समेत 42 से अधिक लोग जख्मी हुए हैं।
रोजनामा नवाएवक्त ने खबर दी है जिसमें बताया गया है कि प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक ट्वीट के माध्यम से उनकी सरकार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय साजिश होने का सबूत देते हुए अमरीकी अधिकारी का नाम उजागर किया है। अखबार ने बताया है कि उन्होंने अमेरिका के स्टेट सेक्रेटरी ऑफ साउथ एंड सेंट्रल एशिया का नाम लेते हुए कहा है कि मेरे खिलाफ लिखे गए धमकी भरे खत में इनका नाम लिया गया है। अखबार ने कहा है कि इस सिलसिले में भारतीय पत्रकार ने जब इस अमेरिकी अधिकारी से सवाल किया तो उन्होंने इसका जवाब देने से इनकार कर दिया है। इमरान खान का कहना है कि उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय साजिश नाकाम कर दी है और देश एक नए चुनाव के लिए तैयार हैं।
