नई दिल्ली, 03 मार्च (हि.स.)। रूस के हमले के बाद यूक्रेन से हजारों मेडिकल छात्र स्वदेश लौट रहे हैं। यूक्रेन से सुरक्षित लौटे छात्रों को अब भविष्य की चिंता सताने लगी है। इन छात्रों के भविष्य को देखते हुए भारत सरकार एफएमजीएल रेगुलेशन एक्ट में बदलाव करने पर विचार कर रही है। ऐसे संकेत गुरुवार को आयोजित प्रेसवार्ता में नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने दिए।
डॉ. वीके पॉल ने कहा कि सरकार यूक्रेन से लौटे छात्रों के भविष्य को देखते हुए एक्ट में बदलाव करने पर विचार कर सकती है। नियमों के तहत जो भी उपाय किए जा सकेंगे, किये जाएंगे। इस मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय विचार कर रहा है। यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले तकरीबन 20 हजार भारतीय मेडिकल छात्र हैं ।
उल्लेखनीय है कि यूक्रेन से लौटे मेडिकल के छात्रों को भारत के कॉलेजों में दाखिला दिलाने के लिए ‘फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिंग रेगुलेशन एक्ट’ में बदलाव करना होगा। अभी तक फॉरेन मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई करने वाले छात्रों को कोर्स की पूरी अवधि के अलावा ट्रेनिंग और इंटर्नशिप भारत के बाहर ही करनी होती है। यूक्रेन और रूस में मेडिकल की पढ़ाई 6 साल में होती है, फिर 2 साल इंटर्नशिप होती है। ऐसे में पढ़ाई बाधित होने की स्थिति में हजारों बच्चों का भविष्य संकट में पड़ गया है।
